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गुरु की महिमा

Poonam Mishra 27 Jul 2024 कविताएँ समाजिक गुरु की महिमा को शब्दों में ना बयां कर सकी 32382 0 Hindi :: हिंदी

शीर्षक ----  गुरु की महिमा

गुरु की महिमा को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है 

प्रथम पाठशाला घर से शुरू होती है जिसमें मां होती है पहली गुरु !
जिसने गिर कर, उठना ,उठकर गिरना ,
अच्छे बुरे का ज्ञान दिया !
मेरी मां है पहली गुरु !
कुछ यूं दुनिया से अनजान थे हम
 तुमने मुझे आकार दिया ।
जीवन के इस पथ पर चलने के
 लिए तुमने मुझे तैयार किया ।
 अपनी ज्ञान की बातों से मेरा। जीवन उज्जवल किया ।
मेरी कमियों को बता कर
 मुझे भले बुरे का ज्ञान दिया।
 उंगली पड़कर तुमने मुझे
 दुनिया की पाठशाला में डाल दिया ,
जीवन में हम सीखते ही रहे 
कई गुरुओं का ज्ञान मिला।
 उन गुरुओं की महिमा को मैं, शब्दों में ना बखान सकी !
धन्य है वह गुरु जिन्होंने मुझे 
जीने का एक सार दिया


स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा 
उत्तर प्रदेश वाराणसी
(मास्टर ऑफ़ आर्ट्स M,A)
(बैचलर ऑफ़ एजुकेशन  B,ed ,,) ,बॉम्बे आर्ट

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