MD SHAYEED ALAM 20 Dec 2025 कविताएँ समाजिक कविताएं मोहम्मद सईद आलम 5642 0 Hindi :: हिंदी
फिर से अपनी बिखरी जिंदगी को संवारने का दिल करता है, जो सपने ख्वाहिशें रह गए हैं अधूरे, फिर से उन्हें मुकम्मल करने का दिल करता है। बेशक जिंदगी की रेस में पीछे रह गया हूं मैं, पर जो आगे निकल गए हैं मुझसे, फिर से उनसे आगे निकलने का दिल करता है। यह माना कि अभी बिखरा हूं मैं, पर फिर से सीमट जाने का दिल करता है।।