Pradeep singh " gwalya " 13 Feb 2024 कविताएँ समाजिक Psdrishti.blogspot.com 51949 0 Hindi :: हिंदी
खुद के लिए ठहरना
खुद का इंतज़ार करना
खुद से बातें कर फिर
खुद को पहचानना
एक कला है ।।
मैं सबसे अलग हूँ
सक्षम हूँ इस दुनिया में
फिर खुद की प्रशंशा कर
खुद को बताना
एक कला है ।।
भागदौड़ भरी इस जिंदगी में
तनाव, चिंता और भय से जकड़े
खुद के चेहरे पर हल्की ही सही
मुस्कान लाना
एक कला है ।।
खुद मंजिल तय करना
खुद से सलाह सम्मति लेकर
अच्छा-बुरा खुद का
खुद तय करना
एक कला है ।।
खुद की गलती पर गुस्सा करना
खुद को डांटना
फिर खुद से रूठकर
खुद को मनाना
एक कला है ।।
बुरे से बुरे दौर में भी
खुद की तारीफ करती वो
खुद से प्रेरित
खुद पर कविताएँ लिखना
एक कला है ।।
✍️प्रदीप सिंह ‘‘ग्वल्या’
pradeep singh 'ग्वल्या' from sural gaon,pauri garhwal,uttarakhand. Born in 29/06/1995 ...