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दरिया भी तन्हा रहता है

Pratibha Khadekar 04 Oct 2026 कविताएँ दुःखद Pratibha s.khadekar 1409 0 Hindi :: हिंदी

दरिया भी तन्हा रहता है 
✍️ प्रतिभा खडेकार 
   ,,,,,7517947668

असीम गहराई सीने में छुपाए, 
जो हर पल चुपचाप बहता है।
दुनिया की नजरों में जो खुश है, 
वो अंदर से सब कुछ सहता है। 
लहरें जिसकी बाहें चूमती,
वह दरिया भी तन्हा रहता है। 

वक्त बदला हालात बदले, 
महलों में सोने के दिए जले। 
पर सुकून की वो एक सूखी रोटी,
जाने किस चौराहे पर छुट्टी।
भूख आज भी अधूरी है, 
चाहे जेब में जितना पैसा है। 
वह दरिया भी तन्हा रहता है। 

कल तक जिसके हाथों में, 
बस छाले और मजबूरी थी।
आज उसके पास जमाना है, 
पर अपनों से ही दूरी है। 
तरक्की कि इस अंधी दौड़ में, 
इंसान भी कैसा-कैसा है ?
 वह दरिया भी तन्हा रहता है। 

सपनों की कोई सरहद नहीं, 
उम्मीदें फिर भी जिंदा है। 
टूट कर भी जो उड़ सके, 
मन वो आजाद परिंदा है।
प्यास भले ही बाकी हो, 
पर हौसला समंदर जैसा हो।
वह दरिया भी तन्हा रहता है। 
                    प्रतिभा खडेकार

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