Ashok Kumar Yadav 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम 111485 0 Hindi :: हिंदी
कविता- चंद्रशेखर आज़ाद हिंद के शेर ओजस्वी स्वतंत्रता सेनानी। अंग्रेजों से लोहा लिया सपूत बलिदानी।। बचपन से सीखा धनुर्विद्या निशानेबाजी। आज़ाद ने भारतवर्ष को दिलाई आज़ादी।। सुनकर दहाड़ अंग्रेज रूपी जानवर भागे। रण में जूझने के खातिर चलते थे आगे।। जुल्मी फिरंगी धूल चाट कर माफी मांगे। उतारकर बदन से चमड़ी सूली पर टांगे।। कसम खा लिया हूं जननी भारतमाता की। अंतिम तक नहीं छोडूंगा गर्दन अंग्रेजों की।। अब स्वतंत्रता ही अंतिम लक्ष्य हो सब की। रगो में जोश,उत्साह भरूंगा जन-जन की।। चलना होगा सबको अपने लिए कर्म पंथ में। जागना होगा सबको नींद से तिमिर अंत में।। स्त्रियों को आगे आना है छोड़ ध्यान कंत में। अब उठा लो तलवार काम न चलेगा संत में।। मैं हूं सदा इस पावन धरा में करता रहूंगा प्रेरित। अंतिम गोली पर मेरा ही नाम लिखा था मुद्रित।। लो मेरी प्रतिकार तुम क्यों चुप बैठे हो बन मूर्ति। मेरी जीत का जश्न मनाना करना इच्छा की पूर्ति।। कवि अशोक कुमार यादव, मुंगेली, छत्तीसगढ़ (भारत)