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चलो ठान लो आज गमों को हम रुलाएंगे

Kirti singh 11 May 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत गमों के भवर में खुशियों का दीप हम जलाएंगे। 13621 0 Hindi :: हिंदी

लिखने वाले ने क्या खूब लिखा किसी के किस्मत को पन्नों पर इस तरह उतारा मानो नाटक की भूमिका निभाने वाला पात्र जीवन को बनाया खेल और हम सबको खिलाड़ी। खेल खेलने वाले किस्मत कभी हमें दौड़ाआती कभी हमें हंसाती कभी हमें रुलाती एक पात्र के समान नाटक में भाग करते हुए हम अपने आप को भूल कर वही जीवन जी कर कभी खुश हो जाते और कभी दुखी और अपने असली अस्तित्व को भूल जाया करते हैं । क्या जीवन के हम एक कठपुतली है जो सुख-दुख के भंवर में फंसकर रह जाएगे। या फिर जीवन के खेल में शामिल होकर अपने लिए एक खुशियों का संसार खुद ही बनाएंगे। या हम जीवन के दुखों के भवर में खुशियों का दीप खुद से जलाएंगे। अगर चाह हो जीवन मे खुशियों का आनंद उठाने का तो जीवन तो क्या हमारी मौत भी हमें नहीं रुलाएगी। चलो ठान लो आज से ही जीवन में गम हमें नहीं बल्कि हम गमों को रुलाएंगे।  Kirti singh

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