संदीप कुमार सिंह 16 Jul 2026 कविताएँ समाजिक #Google Serch #Bast Story #Bast Poems #Followers #Nonfollowers #Foryou 285 0 Hindi :: हिंदी
चाहत कभी न यूं मरे, बड़े स्वप्न को देख। जिन्दा दिल हर पल रहें, प्राण बने नव लेख।। प्राण बने नव लेख,जिसे पढ़कर सब सीखे। और करे उत्कर्ष,रहे बनकर सब तीखे।। कहते कवि संदीप,हृदय मत करिए आहत। खुशियों का कर साथ,पूर्ण करिए सब चाहत।। चाहत अभी जवान है,गौरव मय है भाल। साँस साँस में हौसला,भारत का हूं लाल।। भारत का हूं लाल,शत्रु पर भाड़ी पड़ता। वैसे हूं दिलदार,करूं कभी न मैं जड़ता।। कहते कवि संदीप,सदा देता हूं राहत। चाहूं नम्र सम्मान,हृदय की है ये चाहत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....