कवि सुनील नायक 10 Jul 2026 कविताएँ समाजिक Kavi Sunil Nayak, कवि सुनील नायक, अंधविश्वास पर कविता 501 0 Hindi :: हिंदी
अंधविश्वास जब तन में दर्द, बुखार चढ़े, तो डॉक्टर से मुँह क्यों मोड़ें? झूठे डर की राह पकड़कर, भोपों के पीछे क्यों दौड़ें? बीमारी का होता कारण, विज्ञान जिसे पहचानता है। लेकिन अंधविश्वास का पर्दा, सच को अक्सर ढाँप जाता है। कोई कहे "भूत का साया", कोई बोले "प्रेत का जाल", इलाज छोड़, पैसे लुटते, हो जाता जीवन बेहाल। मंत्र-तंत्र से रोग न भागे, न झाड़-फूँक से जान बचे। समय पर दवा और उपचार, जीवन में नई आस रचे। भोपों की झूठी बातों में, अपनी मेहनत मत गँवाना। अंधविश्वास छोड़कर भाई, सही इलाज ही अपनाना। ज्ञान की लौ जब घर-घर जले, अज्ञान का अंधेरा मिट जाएगा। डॉक्टर, दवा और विज्ञान से, हर जीवन फिर मुस्काएगा।