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भारत को भगवान मन लिया मैने।

Pandit Vishal Mishra 30 Jan 2025 कविताएँ देश-प्रेम #भारत को भगवान मान लिया #लहू को अंगार#विशालमिश्र#राष्ट्र कविता 31805 0 Hindi :: हिंदी

क्यों लहू को अंगार लिखा है मैने।
क्यों शब्दों को प्रहार लिखा है मैनें ॥
आखिर क्यों कलम की धार लगाई जाती है।
आखिर क्यों गलियों मे गुहार लगाई जाती है।।
भूखों की और दीनो की मैं पीर सदा ही गाऊँगा।
चीखना अगर यही होता है। तो चीखूंगा चिल्लाउंगा।।
चुने गए जो दीवारो मे व्यथा कहूंगा गानो मे।
धड़ से जिसने युद्ध लड़ा दोहराऊगा मैं कानो मे।।
भारत मां का बहुत अपमान सुना है मैने।
इसलिए आखिर में रतजगा चुना है मैने ।।
सुनो भगत की बोली को।
और वीरो का यशगान सुनो।।
लहू दिया माटी को जिसने।
उन सबका गौरव गान सुनो।।
खुलकर आज मैं बोल रहा हूँ। 
सुनो सारा जहान सूनो।।
सुनी कलम की चिंगारी से।
जय जय हिंदुस्तान सुनो।।
शब्दो से ही पुष्प चढ़ेंगे अब ये ठान लिया मैने।
आखिर मे भारत को भगवान मान लिया मैने।।
---  ।। " पंडित विशाल मिश्र"।।

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