Saurabh Sonkar 31 Aug 2024 कविताएँ समाजिक बढ़ना है तो झुकना सीखो लोगों से नहीं रे बुद्धू परिस्थितियों से लड़ना सीखो सुनना सीखो सुनना सीखो हर पाड़ हराना है तुझको तू पीठ में इतनी .कुव्वत रख व्यवहार न सीखा विनय ही तो तूने फिर कैसी शिक्षा पायी है गर तूने शिक्षा पायी है रे वत्स तुझे करना होगा लड़ना होगा झुकना होगा बढ़ना होगा... परिस्थितियों में समायोजन कर न सके धिक्कार है उसकी शिक्षा पर रणभूमि विजय कर लाना है सीने को अपने चौड़ा कर वही पथिक सफल हो पायेगा जो पथ पर बिखरे शूल से छाती में अदम्य साहस रख विजित कुशलता रखता हो तू कर सकता है लड़ सकता है रे वत्स तुझे करना होगा लड़ना होगा झुकना होगा बढ़ना होगा... - सौरभ सोनकर 47536 0 Hindi :: हिंदी
बढ़ना है तो झुकना सीखो
लोगों से नहीं रे बुद्धू
परिस्थितियों से लड़ना सीखो
सुनना सीखो सुनना सीखो
हर पाड़ हराना है तुझको
तू पीठ में इतनी .कुव्वत रख
व्यवहार न सीखा विनय ही तो
तूने फिर कैसी शिक्षा पायी है
गर तूने शिक्षा पायी है
रे वत्स तुझे करना होगा
लड़ना होगा झुकना होगा बढ़ना होगा...
परिस्थितियों में समायोजन कर न सके
धिक्कार है उसकी शिक्षा पर
रणभूमि विजय कर लाना है
सीने को अपने चौड़ा कर
वही पथिक सफल हो पायेगा
जो पथ पर बिखरे शूल से
छाती में अदम्य साहस रख
विजित कुशलता रखता हो
तू कर सकता है लड़ सकता है
रे वत्स तुझे करना होगा
लड़ना होगा झुकना होगा बढ़ना होगा...
- सौरभ सोनकर