संदीप कुमार सिंह 30 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 23425 0 Hindi :: हिंदी
औजार भी है आवश्यक जीवन के लिए, और प्यार भी है आवश्यक जीवन के लिए। दुनिया में लाखों दोस्त भी हैं बनते, और लाखों दुश्मन भी हैं बनते। कभी_कभी शांत रहना कमजोरी का निशान, फिर आदतन कुछ मानव होने लगता हावी। ऐसे में मुंह तोड़ देना पड़ता जवाब, फिर जीवन आता सही मोड़ पर। औजार से भी सबल होना चाहिए, क्योंकि जीवन में जंग से भी हो सकता सामना। लोग इस तरह से अपने को हैं सक्षम करते, कहीं हम_आप तो पीछे नहीं रह गए। औजारों की तो एक अलग है अनोखा दुनियां, जिसे देख औजार सौकिन का रोम_रोम खिलता। जिसमें बहुत बड़ी लागत है लगती, और इसी से कितनों का ख्वाब भी है सजता। इसलिए औजार से हमसब रखते हैं प्रेम, जिसका कई प्रकार है यहां धरा पर मौजूद। अधिकतर औजार तो हमारे दैनिक कार्य में ही लगता, जिससे हमारी जिन्दगी है संवरती। औजार को भी बना लूं अपना हिस्सा, जिसके सहारे बना दूं कोई नवीन किस्सा। जिसे सुनकर लोगों में खूब जोश जगे, फिर हर मुश्किल आसान ही आसान लगे। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....