शरद भूषण मोंगरा 10 Sep 2026 कविताएँ धार्मिक ईश्वर 5973 0 Hindi :: हिंदी
अनहद नाद धुर धाम तें, बरस रहा निशदिन। किन्तु मनुष भ्रमित हुआ, तरस रहा निशदिन।। शरद भूषण मोंगरा
Login to post a comment!
...