Anilkumar Rathwa (Sameer) 30 Oct 2025 कविताएँ समाजिक "अकेले खड़े होने का साहस रखो" 16516 0 Hindi :: हिंदी
अकेले खड़े होने का साहस रखो, चाहे सारी दुनिया विरोध में क्यों न हो। सच की राह कठिन सही, पर उजली होती है, डर की हर दीवार वहीं ढह जाती है, जहाँ हिम्मत होती है। लोग हँसेंगे, कहेंगे — "ये संभव नहीं", पर वही जीतता है जो कहे — "मैं रुकूँगा नहीं!" भीड़ के पीछे चलना तो आसान काम है, पर रास्ता नया बनाना असली नाम है। तूफान में भी जो दीपक जलाए रखता है, वही अंधेरे में उम्मीद बनाए रखता है। जो खुद पर यक़ीन रखे, वही आगे बढ़ता है, जो गिरकर भी उठे, वही इतिहास गढ़ता है। मत डर कि कोई तेरे साथ नहीं, तेरे भीतर ही तेरा परमसाथी है वहीं। कदम बढ़ा, क्योंकि राह खुद बन जाएगी, जब तू ठान ले, तो मंज़िल झुक जाएगी। अकेले खड़े होने का साहस रखो, क्योंकि सच्चा विजेता वही होता है, जो भीड़ में नहीं, अपने विचारों में अडिग होता है।