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अब भी वे आखें मौन है

Ramesh prajapat 19 Jan 2025 कविताएँ दुःखद हिंसा को देख कर अनदेखा करना 32327 0 Hindi :: हिंदी

संसार अब तक पापो से जिया है, 
इस अंधकार को उजाले से दूर नहीं भगाया जा सकता, 
दीपक तो भारत के लोगों में जलाना पडे़गा, 
क्योंकि अब भी वे आखें मौन है ||

मैंने संसार को रोते हुए देखा है, 
आसु नहीं उनमें खुन देखा है, 
सरेआम इज्जत को बजारो में निलाम कर दिया, 
नारीयों का हुआ इतना अपमान, 
क्योंकि अब भी वे आखें मौन है ||

वस्त्र हरण महाभारत में हुआ, 
अब नारियों ने ख़ुद वस्त्र का हरण कर लिया, 
वो प्रतिष्ठा नहीं रही अब इनसानियत की, 
क्योंकि अब भी वे आखें मौन है ||

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