SHUBHAM PATHAK 06 Oct 2024 कविताएँ अन्य कविताएं, शुभम पाठक 29766 0 Hindi :: हिंदी
आदते मुझमे भी बुरी है कई लेकिन औरो की ख़ुशी देख कर जलता नहीं हूँ मे हाँ कामयाबी के लीये उत्सुक जरूर हूँ मे लेकिन औरो की कामयाबी पर मचलता नहीं हूँ मे कई तरीके है कामयाब होने के लेकिन गलत राह पर चलता नहीं हूँ मे बेशक़ फिलहाल नाकामयाब सा हूँ मे लेकिन खुद्दार हूँ इसी लीये तो अपनों की आँखों मे सलता नहीं हूँ मे ये भी कटु सत्य है की मेहनत करता हूँ लेकिन किसी गैर के टुकड़ो पे पलता नहीं हूँ मे बेशक़ चींटी की तरह मेहनत करता हूँ लेकिन हवा का सहारा लेकर उछलता नहीं हूँ मे कई बार मंजिल पर चढ़ा हूँ गिरा हूँ फिर चढ़ा हूँ लेकिन ईस बहकावे की दुनिया मे फिसलता नहीं हूँ मे ✍🏻✍🏻शुभम पाठक✍🏻✍🏻