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प्रतीक्षा

हुकम चन्द जैन 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत पिया की प्रतीक्षा 77831 0 Hindi :: हिंदी

तरस रहे नैना पिया मनवा  अकुलाए
 सावन जस भीगी रतिया फूलन झुलाएँ
बिन झपके पलकें राह तके  नैना
 मद भरा बसंत नहीं पतझर बन जाए 
मीत प्रीत प्यास लिए चातक निहारे 
सारी रात यूं ही ना जीवन झर जाए 
        कंत अब तो आओ 
        प्यास मन की बुझाओ
        रंग नेह का रचाओ |
रजनीगंधा की सुरभि मुझको बहकाय 
मुझे गंध इसकी याद तेरी दिलाए
नेह का बिछौना है प्रीत की है चादर
 लहरें हिल्लोर रही वेग लिए सागर
 मन भाई कल्पनाएं मन को जलाएं 
सारी रात करवटों में यूं न बीत जाए 
        कंत अब तो आओ 
       प्यास मन की बुझाओ 
       रंग नेह का रचाओ |
हल्दी और चंदन का उबटन लगाया 
तन का श्रृंगार किया मन को सजाया 
मेहंदी रची हाथों में पावों में महावर 
माथे सजी बिंदिया नैनो में काजल 
मेघों अब चांद की न आभा छुपाओ
 अलको का घुंघट है साजन उठाओ 
            कंत अब तो आओ
            प्यास मन की बुझाओ 
             रंग नेह का  रचाओ |
कानों में झुमका नाक नथनी लहराए
 मुड़ के द्वार देखूं माथ बोर सरक जाए 
बार-बार फेरू मैं अंगूरी में मुंदरी 
दांतो के बीच में तड़प रही चुनरी 
हाथों में कंगना बजे पांव की पायल 
खनक झनक इनकी कहीं थम ही न जाए
           कंत अब तो आओ 
           प्यास मन की बुझाओ
           रंग नेह का रचाओ |
बावरे नयन द्वार देहरी निहारे 
कदमों की आहट पर कान हूं लगाए
 अंगना में परछाई डालन की डोले 
मनवा कहे कि मन प्राण लौट आए 
बहुत रात बीत रही और देर ना लगाओ 
थपकी दे दो द्वारे या साकली बजाओ 
         कंत अब तो आओ 
         प्यास मन की बुझाओ 
         रंग नेह का रचाओ |
पनघट पर भरने आई गागर में सागर 
सुद्ध  खोई राधा की रीति रही गागर 
श्याम नहीं आए हैं अब तक मनाने 
राधा की पीड़ा को राधा ही जाने 
श्याम अब तो आओ रूठी राधा को मनाओ
 कर्णप्रिय बांसुरी से नेह बरसाओ 
           कंत अब तो आओ
           प्यास मन की बुझाओ 
           रंग नेह का रचाओ |
बिखरे तन वेश और केश भी बिखर रहे
 एकाकी मनभाव दर्द से लरज रहे 
अश्रु भरे भीगे नयन फैल रहा काजल 
जितना संभालू ढलके बैरी ये आंचल 
माथे की बिंदिया को क्लेश नहीं भाए
 खिली कली मन की कहीं मुरझाना न जाए
            कंत अब तो आओ
            प्यास मन की बुझाओ 
             रंग नेह का रचाओ |

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