Rabindra kumar mandal 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #hind #Hindi kahani#Hindi gajal ##poem #cartoon # chudel kahani# prem kahani 30112 0 Hindi :: हिंदी
((((((वास्तिवकता)))))))) हम वो कवि नहीं जो कल्पना में खो जाते है, हम वो कवि है वास्तिवकता का दर्शन करवाते है, सूर्य की तपन बादलो के बौछार कड़कती ठण्ड में जी लेते है, खेतो में काम करते करते नदियों के पानी पी लेते है खेत का मेढ़ है विश्राम कक्ष और हरी घास बिस्तर मेरा, खुले असमान ही छत और धरती ही है घर मेरा, दशो दिशायें खिड़की है,रोशन करता चाँद सितारे, धरती माँ के आँचल में आते है कितना नींद प्यारे, आने जाने वाले बटोही को अन्न जल ग्रहण करवाते है, हम वो कवि नहीं जो कल्पना में खो जाते है, हम वो कवि है वास्तिवकता का दर्शन करवाते है, पांव है नंगे रुखा बदन है,माथे पर पगड़ी है निशान, मौसम के हर सितम को हस् के सहता है किसान, किसानों के ही जैसा चरवाहों का है हाल, हाथ में लाठी ,लाठी में पोटली पशुओं का करता देखभाल, थक जाता है चलते चलते पेड़ के नीचे विश्राम किया, कन्धे पर के गमछे को मेढ़ पर ही तान दिया, एक ही गमछे को कई उपयोग में लाते है , उसी गमछे पर रखकर सत्तू भी खाते है, पैरों में है फटा वियाई,बदन झुलस जाते है, जेठ की दुपहरिया में फिर भी पशु चराते है इनके लिए हम जैसे कवि हमेशा आवाज उठाते है हम वो कवि नहीं जो कल्पना में खो जाते है, हम वो कवि है वास्तिवकता का दर्शन करवाते है,