Uday singh kushwah 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य Google/yahoo/bing 14136 1 5 Hindi :: हिंदी
साख पर नव पल्लव लग आये,
नभ मेंं डोले,बादल इतराये,
बाग मेंं कोयल कूक सुनाये,
सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए।
फिर प्रीत का मौसम छाए,
पवन बैठ सिराहने,नव गीत सुनाये,
नव पुष्प सूनी-साख पर इठलाये
सखी ,हृदय मेंं फागुन बौराए ।
तामसी रजनी मेंं,नक्षत्र बिखरे
पडे़ हैं टिम-टिमाये...
चाँदनी अवगुठंन से देखती,
शशि को आँख चुराये,
पग -पग धरती-धरणी भी
विकसित होती प्रकृति को-
देख मंद-मंद मुस्काये,
सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए।
सूखी-साख पर प्रफुल्लित टेसू पुष्प
हृदय मेंं अनुपम-अनुराग जगाये,
भंबरे भी फूलों का मकरंद लिए,
प्रकृति के गुणगान गाये
यह सकल वातावरण हृदय मेंं,
आंछादित हो, नव एहसास जगाये,
सखी,हृदय मेंं फागुन बौराए।
* यू.एस.बरी✍️
3 years ago