akhilesh Shrivastava 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक मनुष्य जीवन की सबसे अमूल्य निधि है मां 68795 0 Hindi :: हिंदी
मां दिवस पर सभी माताओं को
सादर प्रणाम
* मां *
मां शब्द के एक अक्षर में
प्रेम अनंत समाया है।
ईश्वर की इस अनुपम कृति को
कोई समझ न पाया है ।
नौ महीने गर्भ में रखकर
अपना खून पिलाया है ।
इस शरीर पर मत घमंड कर
ये मां की दी हुई काया है ।
मां ने अपना दूध पिलाकर
हमें अम्रत पान कराया है ।
मां के त्याग तपस्या का ऋण
इंसा चुका न पाया है।
मां की लोरी को सुनकर
आनंद नींद का आया है ।
जीवन में ऐसा सुकून फिर
कभी नहीं मिल पाया है ।
मां की ममता की गहराई
नाप नहीं कोई पाया है।
मां के आंचल की छाया में
सुख आनंद ही पाया है ।
प्रथम गुरु बनकर मां ने
अपना कर्तव्य निभाया है।
संस्कारों की शिक्षा देकर
अच्छा इंसान बनाया है ।
अंतिम सांस तक माता ने
संकट से हमें बचाया है ।
निर्मोही संतान हो फिर भी
मां ने प्यार लुटाया है ।
खुशनसीब हैं वो संतानें
जिन पर मां की छाया है ।
ईश्वर के सानिध्य को उसने
मां के रूप में पाया है ।
मां शब्द के एक अक्षर में......
रचियता --अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...