रोhit Singh 29 Jun 2024 कविताएँ अन्य #दिल्लीमेट्रो #Delhimetropoem #रोhitsingh 28920 0 Hindi :: हिंदी
चलो अपने रोज का सफ़र बताता हूं रोज मेट्रो के पथ से आता जाता हूं मेरे घर से ऑफिस काफी ज्यादा दूर हैं जहां से मैं बैठता हूं बस स्टेशन शादीपुर हैं पहले डिब्बा छोड़ मैं दूसरे में झट चढ़ जाता हूं पहले डिब्बा महिलाओं के लिए आरक्षित हैं बाकियों को उन पर आकर्षित पता हूं भीड़-भार भाग दौड़ रोज जीवन का ये मेला हैं मुझे लगा मैं ही हूं, यहां तो हर कोई अकेला हैं गेट खुलते ही अंदर आने जाने को लोग अड़े हुए हैं भैया बैग आगे कर लो हम भी तो खड़े हुए हैं किसी की चतर-पटर, तो कोई चुपचाप मौन हैं कोई ख़ुद में खोया हुआ कान में लगे यार फोन हैं दाएं बाएं कोने में कोई बाबू सोना को मना रहा हैं कोई रिलीस के बुखार से ग्रस्त, रिलीस बना रहा हैं और हां... हिंदी इंग्लिश का उच्चारण दरवाजे दाएं बाएं खुलेंगे पॉकेट पर ध्यान रखना गया तो फिर कुछ ना मिलेंगे जैसे-तैसे करके किस्मत से सीट मिल जाता हैं लक अच्छा हुआ तो ठीक वरना वह भी दान में जाता हैं रेड येलो ग्रीन ब्लू लाइन ये है दिल्ली मेट्रो का मैप उतरते समय सावधानी रखिएगा प्लीज माइंड द गैप हर रोज का सफ़र हैं ये इससे मुमकिन नहीं मुकरना हैं अगला स्टेशन सेक्टर 15 है भैया क्या आप को भी उतरना हैं