संदीप कुमार सिंह 31 May 2026 कविताएँ समाजिक #Rachna#Sahity#Doha#Super#Hindi#Samajik 4335 0 Hindi :: हिंदी
अपनों का जब साथ अब तो धोखा सा है लगता,अपनों का जब साथ l काम निकल जब जाता है तो,खींच रखे तब हाथ l मिले दर्द अक्सर अपनों से,दुश्मन फिर भी ठीक= कर्म करे आगे निकले जो,उन्नत उसका माथ ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....