Uday singh kushwah 30 Mar 2023 कहानियाँ प्यार-महोब्बत 185774 4 5 Hindi :: हिंदी
तू...मुझे मिल न पायी,
सौभाग्य से...।
इसीलिए तो रोज
मिलता हूँ,यादों में...।
नहीं तो तुम-हम,दूर-दूर
होते इस स्वार्थी जमाने में...।
जो तुमने... मेरी हथेली
पर,वेल-वूटे वनाये थे...।
उनमें अब फूल
निकल आये हैं...।
जब तुम्हारी...याद आती है
तो...।
मैं...अपनी हथेलियों को
सूंघ लेता हूँ...।
यू.एस.बरी
लश्कर,ग्वालियर,म.प्र.
3 years ago
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