Sweta Kumari 14 May 2024 कहानियाँ समाजिक सम्मान 48101 0 Hindi :: हिंदी
शीला जी आज सुबह से बहुत परेशान थी।उनके मन मे उधेडबुन चल रही थीकि वह क्या करेंगी? जिस सम्मान के लिए वह बड़े बेटे -बहू का घर छोड़कर चली आई। आज फिर वही सम्मान दाँव पर लगा था।अब वह कहां जायेगी।-विधवा आश्रम या फिर बेटी मीता के घर। वह कोई निर्णय नही ले पा रही थी। जबसे उन्होंने छोटी बहू को फोन पर बातचीत करते हुए सुना कि आज मेरे घर किटी पार्टी है;तब से वह परेशान है।उनका परेशान होना लाजिमी था।पति की मौत के बाद उन्होंने पाँपटी दोनो बेटो मे बराबर बराबर बाँट दी और सोचा कि अब आराम से बेटे-बहू के साथ मिलकर रहेंगी। पोते -पोती के साथ खेलते जीवन गुजर जाएगा। लेकिन यह एक दिवास्वप्न था।बड़े बेटे के घर रहते हुए उन्हे अभी मात्र दो महीने ही हुए थे कि उनकी बडी बहू ने घर पर किटी पार्टी रखी।उसने शीला जी के साथ मिलकर तरह तरह के व्यंजन बनाए। सब कुछ ठीक चल रहा था।शाम मे बडी बहू की सहेलि याँ आई। पार्टी ठीक-ठाक चल रही थी तभी शीलाजी अपनी पोती नेहा को ढूंढती हुई हाँल मे आई। उन्हे देखकर एक सहेली ने पूछा-ये कौन है? बडी बहू ने मुस्कराकर कहा-मेरी परमानेनट सर्वेंट। यह सुनकर शीलाजी को इतना बुरा लगा कि वह दूसरे दिन बडी बहूँ का घर छोड़कर छोटी बहू के घर आ गई। अब आज फिर किटी पार्टी है।उन्हे लगा कि पता नही छोटी बहू उनके बारे मे क्या कहेगी।बडी बहूँ तो घरेलू थी किंतु छोटी बहूँ तो नौकरी वाली है,पता नही उसके मन मे उनके लिए क्या भावना है?बस यही सोच सोचकर वह परेशान हो रही थी। शाम मे पार्टी के पहले छोटी बहूँ ने उन्हे एक साडी लाकर दी और कहा कि वह इसे पहन ले।फिर वह खुद तैयार होने चली गई। शाम सात बजै पार्टी शुरू हुई। छोटी बहूँ की बहुत सारी सहेलियाँ और साथ काम करने वाली औरते भी पार्टी मे आई थी।शीलाजी अपने कमरे मे बैठकर चुपचाप से टी.वी देख रही थी ,तभी छोटी बहेँ ने आवाज दी-माँ जी कहाँ है आप? बाहर आइए सब आपसे मिलना चाहती है ।शीला जी बाहर नही आना चाहती थी, किन्तु तभी उन्हे मीता की आवाज सुनाई दी-अरे मम्मी कहाँ हो तुम? बाहर तो आओ ।मीता की आवाज सुनकर शीलाजी चौक गई। फिर वह अनमने मन से बाहर आई उनके बाहर आते ही तालियो की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत हुआ। सभी ने मिलकर "हैपी बथ॔ डे टू यू " गाना गाया।उनके छोटे बेटे ने उन्हे गुलदस्ता देकर औैर पैर छूकर कहा कि आप हजार साल जिए ताकि आपका आशीर्वाद हमे मिलता रहे। छोटी बहूँ ने पैर छूकर कहा-माँ जी आप इस घर की परमानेनट मेम्बर ही नही मालिक भी है। हमलोग आपके बच्चे है ।इसघर मे आपका सम्मान हमेशा बना रहेगा इसलिए हमारी छोटी-मोटी गलतियो पर हमे डाँट देना लेकिन इस घर को छोड़कर जाने की कभी सोचना भी नही।छोटी बहूँ की इस बात से शीलाजी की आँखे भर आई। उन्होंने भरे गले से कहा-जिस घर मे मेरा इतना सम्मान है मै उसे छोड़कर कभी नही जाऊँगी।