Anesh Gautam 31 Dec 2025 कहानियाँ धार्मिक Periyaar ramaswamy nayekar ji 20413 0 Hindi :: हिंदी
🟤 पेरियार ई.वी. रामासामी नायकर का जीवन परिचय (महान समाज सुधारक, नास्तिक विचारक और आत्मसम्मान आंदोलन के जनक) 🟢 परिचय पेरियार ईरोड वेंकट रामासामी नायकर (Periyar E. V. Ramasamy Naicker) का जन्म 17 सितंबर 1879 को तमिलनाडु के ईरोड नगर में हुआ था। वे एक महान समाज सुधारक, तर्कवादी (Rationalist) और दलितों एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उन्हें “पेरियार” (महान व्यक्ति) की उपाधि दी गई, जो आगे चलकर उनके नाम का ही पर्याय बन गया। 🟢 प्रारंभिक जीवन पेरियार का जन्म एक समृद्ध व्यापारी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम वेंकट नायकर और माता का नाम चिन्नाथई अम्माल था। बचपन से ही उनमें न्याय और समानता की भावना थी। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में प्राप्त की, लेकिन धार्मिक पाखंड और जातिगत भेदभाव के कारण उन्होंने स्कूल छोड़ दिया। वे स्वभाव से जिज्ञासु और तर्कशील थे — अंधविश्वास को कभी स्वीकार नहीं किया। 🟢 विवाह और पारिवारिक जीवन पेरियार का विवाह 19 वर्ष की आयु में नगम्मल से हुआ था। वे एक साधारण, दयालु और शिक्षित महिला थीं। पेरियार की पत्नी ने हमेशा उनके सामाजिक कार्यों में सहयोग दिया। 🟢 राजनीतिक जीवन की शुरुआत पेरियार ने अपने जीवन की शुरुआत एक व्यापारी और बाद में नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में की। वे सामाजिक न्याय और स्वच्छ प्रशासन के पक्षधर थे। 1919 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। परंतु जब उन्होंने देखा कि कांग्रेस संगठन में भी ब्राह्मणवाद और जातिगत भेदभाव व्याप्त है, तो 1925 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। 🟢 “आत्मसम्मान आंदोलन” (Self-Respect Movement) 1925 में पेरियार ने “स्वाभिमान आंदोलन” (Self-Respect Movement) की स्थापना की। इस आंदोलन का उद्देश्य था: जाति प्रथा का अंत महिला समानता अंधविश्वासों और धार्मिक शोषण के खिलाफ संघर्ष तर्कवाद और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना इस आंदोलन ने दक्षिण भारत में सामाजिक जागरण की लहर पैदा कर दी। 🟢 नास्तिकता और तर्कवाद पेरियार नास्तिक (Atheist) थे। उनका मानना था कि भगवान, धर्म और पुरोहित वर्ग समाज को गुलाम बनाए रखने का साधन हैं। “मनुष्य को किसी देवता से नहीं, बल्कि अपने ही अज्ञान और भय से मुक्ति चाहिए।” उन्होंने कहा कि धर्म और जाति समाज को बांटते हैं, इसलिए मनुष्य को “विवेक” (Reason) और “तर्क” (Logic) को अपनाना चाहिए। 🟢 महिला सशक्तिकरण के समर्थक पेरियार ने महिलाओं के अधिकारों की जोरदार वकालत की। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, समान अधिकार, और विवाह में स्वतंत्रता की मांग की। वे बाल विवाह, दहेज प्रथा और पर्दा प्रथा के खिलाफ थे। “जब तक महिलाएं स्वतंत्र नहीं होंगी, समाज कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता।” 🟢 जाति और ब्राह्मणवाद के खिलाफ संघर्ष पेरियार ने ब्राह्मणवाद और जातिगत व्यवस्था के खिलाफ तीव्र आंदोलन चलाया। उन्होंने कहा कि जाति का कोई वैज्ञानिक या नैतिक आधार नहीं है। यह केवल समाज को बाँटने और शोषण करने का तरीका है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का सम्मान किया और उनके साथ दलित अधिकारों की लड़ाई में सहयोग किया। 🟢 द्रविड़ आंदोलन और राजनीति में भूमिका पेरियार के विचारों से प्रभावित होकर बाद में “द्रविड़ आंदोलन” (Dravidian Movement) शुरू हुआ। उनका मानना था कि दक्षिण भारत के लोग द्रविड़ हैं और उन्हें आर्य प्रभुत्व से मुक्त होना चाहिए। उनकी सोच से ही आगे चलकर DMK और AIADMK जैसे राजनीतिक दल बने। 🟢 साहित्य और प्रकाशन कार्य पेरियार ने “कुदियारासु” (Kudi Arasu) नामक अखबार की स्थापना की, जिसमें वे अपने विचार और सामाजिक सुधार से जुड़े लेख प्रकाशित करते थे। उन्होंने अनेक भाषण और लेख लिखे जिनमें तर्कवाद, समानता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया गया। 🟢 महत्वपूर्ण विचार और उद्धरण “जाति मनुष्य की सबसे बड़ी दुश्मन है।” “धर्म वह जंजीर है जो समाज को गुलाम बनाए रखती है।” “जब तक ब्राह्मणवाद रहेगा, तब तक स्वतंत्रता अधूरी रहेगी।” “भगवान में विश्वास करना अपनी बुद्धि का अपमान है।” 🟢 अंतिम दिन और निधन पेरियार का निधन 24 दिसंबर 1973 को हुआ। उनके अंतिम शब्द थे — “सत्य, समानता और आत्मसम्मान के लिए संघर्ष कभी बंद मत करना।” उनके अनुयायी आज भी उन्हें “Thanthai Periyar” यानी “पिता पेरियार” के रूप में याद करते हैं। 🟢 पेरियार की विरासत (Legacy) आज भी दक्षिण भारत में पेरियार के विचार जीवंत हैं। द्रविड़ पार्टियाँ उनकी विचारधारा पर चलती हैं। उनके नाम पर विश्वविद्यालय, संस्थान और स्मारक बने हैं। उनका जीवन सामाजिक न्याय, समानता और तर्क की शक्ति का प्रतीक है। 🟣 निष्कर्ष पेरियार ई.वी. रामासामी नायकर केवल एक व्यक्ति नहीं थे — वे एक विचारधारा थे। उन्होंने समाज को बताया कि “समानता” और “विवेक” ही सच्चा धर्म है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि एक व्यक्ति ठान ले, तो वह सदियों पुरानी अन्यायपूर्ण परंपराओं को भी हिला सकता है। 📜 लेखक: अनेश गौतम 🌐 satiyadarshanblog.blogspot.com 🔖 Labels: Periyar Ramasamy Naicker, Dravidian Movement, Self Respect Movement, Bahujan Icons, Rationalism, Social Reformers