Kalindri Pal 31 Jul 2026 कहानियाँ समाजिक परिवार की अहमियत 9199 1 5 Hindi :: हिंदी
एक लड़का था / वह अपने परिवार के साथ रहता था / उसका पढ़ने लिखने में मन नहीं लगता था / घर वालों के बहुत कहने पर वह पढ़ने जाता था / घर वालों से कोई मतलब ही नही रखता था, बात-बात पर चिल्लाता था / घर में किसी का कहना नहीं मानता था, उसके घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था / धीरे-धीरे समय बीतता गया एक दिन उसके पापा बीमार हो गए ,अब उसके घर का गुजारा होना मुश्किल हो गया / तो उसे काम के सिलसिले से बाहर जाना पड़ा , उसे बड़ी मुश्किल से काम मिला / अब वहां उसे सुबह खाना बनाना बनाकर काम पर जाना पड़ता था औऱ फिर घर आकर खाना बनाना पड़ता था /वह बहुत परेशान हो जाता था अब उसे घर की याद आने लगी /वह बहुत रोता सोचता की यदि घर वालों का कहना मानता होता तो आज यहां नहीं आना पड़ता / अब उसे परिवार वालों की अहमियत पता हो गई थी /एक दिन उसके पिता ने फोन कर के कहा की बेटा तुम घर वापस आ जाओ मेरी तबियत अब बिल्कुल सही हो गई है /अब वह लड़का घर वापस आ गया और वह पहले से अधिक बदल चुका था, घर में सबका कहना मानता था और घर के सभी कामों में हाथ बताता था / उसके घर वाले बहुत खुश हुए और बोले बेटा तुझमें इतना बदलाव कैसे तो उसने बोला की अब मुझे बाहर अकेले रहकर पता चला कि घर वालों की अहमियत क्या होती है, औऱ अपने पापा के गले लग गया/ घर वाले बहुत खुश हुए और सब मिलजुल कर रहने लगे/
2 months ago
Myself kalindri pal I live in Ghaziabad (new delhi) 🙏😍🥰...