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लघुकथा- नालायक

virendra kumar dewangan 30 Mar 2023 कहानियाँ समाजिक Short Story 45097 2 5 Hindi :: हिंदी

	‘कैसी लगी, लड़की?’ लड़की के घर से निकलकर बिचौलिये ने राजू से प्रश्न किया।

	राजू को लड़की कुछ जमी; कुछ नहीं। वह फैसला नहीं कर पा रहा था कि आगे क्या करना है? 
लिहाजा, फैसला मां पर छोड़ा, ‘‘बताओ मां; कैसी है लड़की?’’

	‘‘हंू...हंू! इस लड़की में कुछ बताने लायक है क्या? जो बताऊं! न शक्ल-सूरत, न रंग-ढंग, न कद-काठी और न ही धन-दौलत। मुझे तो ये लोग भूखे-नंगे लग रहे हैं। ठीक से आवभगत भी नहीं किए। ऊपर से यह भेंगी है, भेंगी!! दिन में भी काला चस्मा चढ़ाई हुई थी। मेरे हैंसडम बेटे के लिए क्या यही भेंगी रह गई है? क्या यही देखने के लिए हम तुम्हारे मेट्रोमनी में पैसा फंसाए हुए हैं?’’ फनफनाते हुए राजू की मां बिचौलिये से मुंह बनाकर बोली।

	इस पर दलाल तीरछे नयनों से कटाक्ष किया, ‘‘दिव्यांगता इसकी सबसे बड़ी दौलत है, जिसकी बदौलत उसे शासकीय नौकरी मिली हुई है। वह प्रतिमाह 80,000/रुपया वेतन पा रही है। ...और आपका लाल! क्या है उसकी योग्यता व प्रतिभा? फखत बेरोजगार!...अजी, वह भेंगी होते हुए भी लायक है, तो आपका बेटा, आंख-कान होते हुए भी तो नालायक है। यह ख्याल और मलाल रखें, मैडम।’’ 
यह सुनकर उनकी बोलती बंद हो गई। मां-बेटे को सांप सूंध गया। वे दोनों बगले झांकने लगे।
			--00--
अनुरोध है कि लेखक के द्वारा वृहद पाकेट नावेल ‘पंचायत’ लिखा जा रहा है, जिसको गूगल क्रोम, प्ले स्टोर के माध्यम से writer.pocketnovel.com पर  ‘‘पंचायत, veerendra kumar dewangan से सर्च कर और पाकेट नावेल के चेप्टरों को प्रतिदिन पढ़कर उपन्यास का आनंद उठाया जा सकता है तथा लाईक, कमेंट व शेयर किया जा सकता है। आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
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निवेदन है कि लेखक की अन्य रचनाओं का अध्ययन करने और उसको प्रोत्साहन देने के लिए ‘‘गूगल प्ले स्टोर’’ से ‘‘प्रतिलिपि एप’’ डाउनलोड कर ‘‘वीरेंद्र देवांगन’’ के नाम से सर्च किया जा सकता है और लेखक की रचनाओं का आनंद उठाया जा सकता है।

Comments & Reviews

virendra kumar dewangan
virendra kumar dewangan धन्यवाद अन्य रचनाओं पर भी समीक्षा लिखें

2 years ago

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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह बहुत बहुत आभार

2 years ago

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