संदीप कुमार सिंह 16 Jan 2024 कहानियाँ प्यार-महोब्बत जो जैसा करे उसे उसके करनी के हिसाब हमें जरूर जतलाना चाहिए 186 0 Hindi :: हिंदी
रूपेश और नेहा अभी तो बहुत ही खुशहाल जिन्दगी जी रहें हैं . और इनका हसता हुआ परिवार प्रगती के पथ पर लगातार बढ़ता जा रहा है. लेकिन इन दोनों का प्रेम कहानी बहुत ही लाजवाब है . जब ये दोनों बिहार के बिहार नैशनल कालेज में B.A में पढ़ाई कर रहे थे . तभी इन दोनों की मुलाकात हुई थी . नेहा बला की खूबसूरत थी जिसे देखकर कोई भी मन मसोस कर रह जाता था. रूपेश की निगाह नेहा को तब देखी जब नेहा कालेज के इंटरटेनमेंट प्रोग्राम में स्टेज पर अपना perfoeme दे रही थी. रूपेश देखते ही कायल हो गया था नेहा के लिए. नेहा को Good Performance के लिए बधाई गुलदस्ता देने सबसे आगे पहुँच कर दिया. वह गुलदस्ता सबसे ही अलग था. जिसमें ग़ज़ब का आकर्षण था. नेहा उस गुलदस्ता को बहुत ही खास बना सबसे अलग उसे रखी थी. उस दिन से नेहा के दिल में रूपेश के प्रति प्यार ही प्यार पनपने लगा था. नेहा रूपेश के करीब आने लगी थी और रूपेश तो नेहा पर मरता ही था. धीरे- धीरे दोनों में नजदीकियां बेहिसाब बढ़ गया था. अब दोनों एक दूसरे से खुलकर प्यार करने लगे थे. दोनों साथ घूमते यहां- वहां और कहीं भी. आलम अब ऐसा हो गया था दोनों का एक - दूसरे के बिना रहना मुहाल हो गया था. इधर दोनों का B.A Honours final भी हो गया था. अब दोनों शादी करने के लिए बेबस थे. रूपेश ने ये बात अपने माँ- पापा जी को बताया और उधर नेहा ने भी ये बात अपने माँ- पापा जी को बताई. फिर दोनों के माँ- पापा जी मिले और शादी का दिन final कर दिए. बड़े ही धूमधाम से रूपेश और नेहा की शादी हुई. दोनों परिवार में खुशियाँ ही खुशियाँ व्याप्त थी. अब बारी आई सुहाग रात की, रूपेश नेहा को देने के लिए सोने का एक Ring बनवा रखा था. दोनों बंद कमरे में बैठे थे. रात सुहानी थी. दो दिल मिलने को आतुर थे. रूपेश ने बड़ा ही मासूमियत से नेहा का हाथ पकड़ा और वह बेशकीमती सोने का Ring नेहा के उँगली मे डाल दिया. नेहा रूपेश के प्यार में मदहोश हुई और रूपेश को अपने सीने से लगा ली. रूपेश ने भी बिना किसी संकोच के नेहा को गले से लगाए नेहा के पीठ को थपथपाकर प्यार देने लगा. दोनों बंद कमरे में पहली मिलन की वह रात थीं जो जीवन भर के लिए यादगार बनने वाली थीं. दो बदन एक जान बनाने के लिए रात भी मानों साथ दे रही हो. दोनों की सांसे आपस में टकरा रही थी. प्यार के आनंद में गोता लगाते हुए दो आत्मा अब एक होने वाले थे. आलिंगन ही आलिंगन दोनों तरफ से लिए-दिए और किए जा रहे थे. रात की कोमलता में दोनों अब एक-दूजे में खो गए थे. इस तरीके से रूपेश और नेहा का पारिवारिक जिंदगी की शुरुआत हो चुकी थी. (भावार्थ:-जो जैसा करे उसे उसके करनी के हिसाब हमें जरूर जतलाना चाहिए. नेहा के Good Performance को जतलाने के बहाने ही नेहा और रूपेश जीवन संगिनी बन गए.) (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....