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लघुकथा- अपशकुन

virendra kumar dewangan 30 Mar 2023 कहानियाँ समाजिक Short Story 61539 0 Hindi :: हिंदी

गली में खासी चर्चा थी कि काली बिल्ली दर्दीली आवाज में रो रही है। उसकी वेदना असहनीय है। 
लेकिन, उसकी पीड़ा क्या है? किसी को समझ में नहीं रहा था। इसीलिए, मुहल्ले में भांति-भांति का तर्क-वितर्क चल रहा था।
राधेश्यामजी कह रहे थे, ‘‘कराह-कराहकर बिल्ली का रेंहकना, गली के लिए किसी अपशकुन का आगाज है। कल ही शर्माजी का पुत्र एडमिड हुआ है। रामजाने कौन सी विपत्ति आनेवाली है?’’
राधेश्यामजी की बात का समर्थन करते हुए दीनदयालजी कहने लगे,‘‘कल हमारे मुहल्ले के लड़कों का बनिया मुहल्ले के लड़कों के साथ हाथापाई हो गया है। भगवान सबका भला करे।’’
इस पर दीवान कक्का कहां चुप रहनेवाले थे, वे भी अपना ज्ञान बधारते हुए कह रहे थे,‘‘लगता है मुहल्ले में अनहोनी होनेवाली है, नहीं तो बिल्ली रातभर रो-रोकर मातम नहीं मनाती।’’
तभी चौपाल में, जहां यह चर्चा आम थी, मोटूभैया ने आकर जानकारी दी, ‘‘बिल्ली का एक बच्चा था। कल किसी ने घुधलके में उसे उठा लिया था। इसी से बिल्ली तड़पती हुई रो रही थी। 
पर आज उसके बच्चे को जहां-के-तहां छोड़ दिया गया है। इससे बिल्ली बड़ी खुश है। 
वह खुशी से उछलकूद कर रही है। लगता है वह अब अपने बच्चे को कहीं छिपा दी है, जहां इंसान की नजर उस पर न पड़े। 
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अनुरोध है कि लेखक के द्वारा वृहद पाकेट नावेल ‘पंचायत’ लिखा जा रहा है, जिसको गूगल क्रोम, प्ले स्टोर के माध्यम से writer.pocketnovel.com पर  ‘‘पंचायत, veerendra kumar dewangan से सर्च कर और पाकेट नावेल के चेप्टरों को प्रतिदिन पढ़कर उपन्यास का आनंद उठाया जा सकता है तथा लाईक, कमेंट व शेयर किया जा सकता है। आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
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निवेदन है कि लेखक की अन्य रचनाओं का अध्ययन करने और उसको प्रोत्साहन देने के लिए ‘‘गूगल प्ले स्टोर’’ से ‘‘प्रतिलिपि एप’’ डाउनलोड कर ‘‘वीरेंद्र देवांगन’’ के नाम से सर्च किया जा सकता है और लेखक की रचनाओं का आनंद उठाया जा सकता है।

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