Poonam Mishra 22 May 2023 कहानियाँ प्यार-महोब्बत लिविंग रिलेशन की एक कहानी 12366 0 Hindi :: हिंदी
जब मैं मुंबई आई मल्टीनेशनल कंपनी में काम करना शुरू किया l कुछ ही समय के बाद मेरा परिचय एक बहुत ही खूबसूरत इंसान से हुआ जो जितना देखने में सुंदर था, उतना ही, उसका दिल ही बहुत खूबसूरत था कुछ दिनों तक हम एक साथ एक ही कंपनी में काम करते रहे lधीरे-धीरे हम लोगों की यह मुलाकात एक अच्छी दोस्ती में परिवर्तित हो गया l मुंबई के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में कोई एक चेहरा देखकर मुझे सुकून मिलता था जिसका नाम था रमेश, मैं जब भी ऑफिस जाती मेरी नजरें उस चेहरे को तलाश करती हमारी यह दोस्ती न जाने कब प्यार में बदल गई हम दोनों एक साथ बस में बैठ कर ऑफिस एक साथ जाते हम दोनों की दोस्ती लगभग 2 साल तक रही उसके बाद हम लोगों को लगा कि हम लोग दिल के इतने करीब आ गए हैं कि हम लोग एक ही फ्लैट में एक साथ रहने लगे लिविंग रिलेशन रमेश के साथ ही 5 सालों तक लिव इन रिलेशन मैं रहे मुझे यह पल बहुत ही खूबसूरत लगा मुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं दी इस इंसान ने बहुत प्यार किया मैं भी उस पर अपनी जान लुटा दी थी मैं तो धीरे-धीरे अपने घर वालों को बताना शुरू कर दिया था कि मैं किसी से प्यार करती हूं और अगर शादी करूंगी तो उसी से मैं अपने मां-बाप की इकलौती संतान थीl मेरे हर निर्णय पर हां तो कर ही देते इतना तो मुझे दिल से विश्वास था ही परंतु कुछ समय के बाद 8 साल तक रिलेशन मैं रहने के बाद रमेश का ट्रांसफर किसी दूसरे कंपनी में हो गया l और वह कहीं और ज्वाइन कर लिया मैं अभी भी अपने उसी पुराने कंपनी में काम करती थी हम दोनों के ऑफिस जाने का समय अलग अलग था आने का समय भी अलग अलग था l मैं रोज जैसे पहले ऑफिस जाने से पहले रमेश का टिफिन बनाना उनके कपड़े रखने उनके सुविधा का ख्याल रखते हुए एक साथ बस स्टैंड की तरफ बढ़ती थी इधर कुछ दिनों से मैं रमेश में कुछ बदलाव देख रही थी जब भी ऑफिस से आते रहते और मुझसे कहते बहुत दूर पड़ता है मेरे ऑफिस से थक जाता हूं l मैं सोच रहा हूं कि ऑफिस के पास ही कोई रूम ले ले और हम लोग भी मिलते रहेंगेl और वैसे भी यहां का किराया बहुत ज्यादा है तुम भी किसी छोटे रूम में शिफ्ट हो जाओl या फिर कोई पीजी में जाकर रहने लगे हम लोग का प्यार इतना कमजोर नहीं कि हम लोग एक दूसरे से अलग होकर के प्यार ना कर सकेl मैंने कहा ठीक है !और कुछ समय क तो दो मुझे! मैं इस पर विचार करती हूं !रमेश ने कहा ठीक है हा .हा . सोच लो ?1 दिन सुबह सुबह मैं टिफिन बना रही थी तभी रमेश आ करके मुझसे बोले कि मुझे आज जल्दी है और मुझे तुमसे एक बात भी कहनी है तुम कुछ दिन में यहां से जा ही रही हो इसलिए मैं सोच रहा हूं कि तुम्हें बता दे मुझे किसी और से प्यार हो चला है? अब मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता !मुझे माफ कर दो! मुझे तुम्हें यह पहले बता देना चाहिए था l मगर मैं अब उसे बहुत पसंद करता हूं और उसके बिना नहीं रह सकता हूं l मैं भी तुमसे यही कहूंगा कि तुम भी कोई अपने जैसी देख लो जो तुम्हारे टाइप का हो जो तुम से मैच करता हूं मुझे माफ करना 1 मिनट के लिए तो मैं स्तब्ध !हो गई मगर फिर मैंने मुस्कुराकर रमेश को देखा और उन्हें गले लगाया. हमने कहा ठीक है प्यार में ईमानदारी होनी चाहिए तुम्हारा और मेरा यही तक का साथ था तुम जा सकते हो मुझे कोई परेशानी नहीं होगी l और रमेश अपना सारा बैग उठाकर के मेरी फ्लैट को छोड़ कर के जाने लगे मैं उन्हें नीचे तक छोड़ने गई और उन्हें बाय किया फिर वापस फ्लैट में आ गई! मैं मूलतः गोरखपुर की रहने वाली थी मैं अपने घर वापस गोरखपुर जाना चाहती थी जहां मैं अपने मां-बाप के साथ समय बिताना चाहती थी और वहीं पर कोई जॉब करना चाहती थी मैंने अपने मां को फोन किया और कहा मैं गोरखपुर आ रही हूं यह एक इत्तेफाक की बात थी कि रमेश भी गोरखपुर शहर का ही रहने वाला था शायद एक शहर से रहने के कारण हम दोनों में इतना ज्यादा परिचय हो गया l एक दूसरे से इतना लगाव हो गया परंतु हम एक दूसरे को अच्छी तरह समझ ना सके हो मुझे यह महसूस हो रहा था कि शायद मेरे प्यार में कोई कमी हो फिर भी मैंने सोचा चलो जो भी साथ गुजारे बहुत अच्छे गुजारे मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है मैं वापस आकर वहीं पर काम करने लगी समय का चक्र तो देखिए दिन-ब-दिन बिता गया और मैंने अभी तक शादी नहीं की और मैं अपने काम में व्यस्त रहने लगी मैंने अपने आप को इतना व्यस्त कर लिया कि मुझे किसी की याद ही नहीं आती मां-बाप ने कई बार कहा शादी कर ,,लो शादी कर लो मैंने कहा नहीं शादी करने से क्या फायदा मैं आपके साथ रहूंगी !कुछ समय पश्चात मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई पिताजी की मृत्यु के दर्द को मेरी मां भी ना सहन कर पाई अभी कुछ समय पश्चात उनकी भी मृत्यु हो गई अब मैं अकेली और मेरा काम यह दोनों ही मेरे साथ ही थे आज मैं 55 साल की हो गई मैं अधेड़ अवस्था की दौड़ से गुजर रही हूं आज न जाने क्यों मन बहुत दुखी था मैं अपने बालकनी में बैठकर चाय पी रही थी तभी अचानक से किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी मुझे लगा इतने सालों के बाद कौन मेरे घर आया शाम के समय वैसे तो कोई भी मुझसे मिलने नहीं आता क्योंकि मैंने घर पर आने के लिए सब को मना किया है मैं बाहर ही सब से मिल लेती हूं मुझे बहुत ज्यादा घर के अंदर लोगों से मिलना जुलना पसंद नहीं है मेरा दरवाजा खुला ही था तो मैंने कह दिया आ जाइए आप जो भी हो अंदर आ जाइए दरवाजा खुला है मैंने देखा सामने एक अधेड़ व्यक्ति का का आदमी खड़ा है जो हाथ में छड़ी लिया हुआ है देखने में वैसे ही खूबसूरत जैसे मैंने आज के 25 ,26 साल पहले जिस व्यक्ति से प्यार किया था मैंने अपने चश्मा लगाया अभी मैंने ध्यान से देखा अरे !यह तो रमेश है! मैं दौड़ कर !उसके गले लग.... गई मैंने पूछा कैसे आना हुआ? इतने सालों के ?बाद अच्छा ! चाय पीने जा रही थी! तुम भी चाय पियोगे अच्छा अभी तक तुम चाय में एक एक चम्मच चीनी ही लेते हो या अब ज्यादा लेते हो क्योंकि? मैं तो मीठा चाय पीती हूं पर अभी भी मैं मीठा पीती हूं तुम कहते थे ना कि तुम चाय मीठा पीती हो इसलिए तुम इतनी मीठी हो मगर तुम तो कम चीनी लेते थे ना क्या ?करें एक चम्मच ही डाले ना? रमेश बस देख कर मुझे मुस्कुरा रहा था और जैसे कि वह पहले मुझे प्यार करता था मेरे गले लग गया मेरा हाथ पकड़ कर बैठ गया कहा चाय तो जरूर पिएंगे !तुम्हारे हाथ का मगर मुझे तुमसे कुछ कहना था उम्र के इस मोड़ पर मैं आज गोरखपुर आया पता नहीं क्यों ?मन में जिज्ञासा हुई तुमसे मिलने की तुम्हारे बारे में मैं पता करता रहता था ?मुझे सब पता चला अंकल आंटी के मरने का मेरा अंदर से साहस नहीं हुआ तुमसे मिलने का तुम से आकर मैं फिर से कैसे मिले मेरी कई रिलेशन रहे एक तुम ही नहीं मैंने कई लड़कियों के साथ मेरे रिलेशन है परंतु कोई भी तुम्हारी तरह मेरे प्रति सच्चा नहीं था मैं ही तुमसे बेवफाई करके दूसरों के पास चला गया और हमेशा ही ऐसे अलग-अलग लड़कियों के साथ मेरे रिलेशन रहे मुझे आज कई बीमारियां हो गई है मैं शरीर से काफी कमजोर हो गया हूं मगर मेरे दिल में कहीं ना कहीं तुम हमेशा से रही हो अब उम्र के इस मोड़ पर मैं एक बात तुमसे कहने के लिए आया हूं तुम ही मेरा प्यार हो तुम ही मेरा पहला प्यार थी तुम ही मेरे आखरी प्यार हो मेरी आंखें भर आई मैं रोने लगी मैंने रोते रोते कहा प्यार तो दिल से ही होता है शरीर से नहीं होता मैंने तो तुमसे दिल से प्यार किया था शरीर का क्या शरीर तो हार मास का बना है 1 दिन मर जाएंगे मिट्टी में जल जाएंगे दिल !दिल तो अजर अमर है मैंने तुम्हें अपने दिल से प्यार किया है तो आज तक करती आई हूं क्या? हुआ जो तुम्हारे कई रिलेशन रहे उम्र के इस मोड़ पर तुम मेरे पास आ गए मेरा प्यार अमर हो गया और हम दोनों एक दूसरे के गले लग कर बहुत देर तक रोते रहे शायद आंसुओं के द्वारा ही अपने गम को कम कर ले मेरा दिल बार बार यह बात रमेश से कहना चाह रहा था कि तुम जुदा हुए थे !छोड़कर मुझे जिस मोड़ !पर मैं आज तक खड़ी हूं उसी मोड़! पर हजार बार पीछे मुड़कर मैंने तुम्हें आवाज़ लगाई! पर मेरी आवाज शायद तुम तक पहुंच न पाई परंतु दिल को यह विश्वास था कि तुम मेरे हो आज नहीं तो कल मेरे पास आओगे ही आओगे स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा