Arun kumar dwivedi 17 Jan 2025 कहानियाँ समाजिक दोस्त 29423 0 Hindi :: हिंदी
दोस्त ? उसका नाम दिनेश था । स्नातक के तीसरे साल में उससे पहली बार कक्षा के बाहर मुलाकात हुई थी , 5.5 फुट का भरे बदन का लड़का चेहरे पर घनी मूँछें , उसकी स्मित हंसी उसके ओंठों से कम ही बाहर निकलती , वह अपने बारे में कम ही बात करता अधिकतर पढ़ाई – लिखाई से संबंधित चर्चा ही होती थी उससे । उससे मिलने के बाद उसके साथ आत्मीय होने में मुझे अधिक समय नहीं लगा । वह बाकी साथियों की अपेक्षा मुझसे कुछ अधिक ही घुल – मिल गया था एक बार बात चीत के दौरान ही उसने मुझे बताया की वह सिद्धार्थ नगर जनपद के किसी गाँव का है । वहाँ उसका ननिहाल है , उसके नाना जी फौज में थे जिसके कारण उसने अपना पिछला जीवन उनके साथ बहुत ही कठोर अनुशासन में गुजारा है जिसकी छाप अभी भी उसके कार्य – व्यवहार में गाहे – बगाहे दिख जाती जाती थी । वह अपने – आपको किसी बड़े घर के नूर- ए – नजर की तरह प्रस्तुत करता । चाय पिलाने के नाम पर रसगुल्ले – पेड़े और जलेबियाँ मैंने उसके साथ राम मिष्ठान पर कई बार खाईं , राम मिष्ठान उस समय बलरामपुर की मशहूर मिठाई की दुकान थी जो अभी भी चौक बाजार के पहले स्थित है जिसे उस समय राम आधार और छोटे भाई मिलकर चलाते थे । कक्षा समाप्त होने के बाद घंटों किसी साहित्यिक विषय पर बहस करना हमारा दैनिक काम था और इसके लिए हम या तो चाय पीने के नाम पर कहीं एकत्र होते अथवा मेरे कमरे पर ही जमावड़ा होता । कभी – कभी हम अपने प्रवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र के घर पर भी किसी साहित्यिक गुत्थी को सुलझाने का प्रयास कर रहे होते । दो वर्ष कब बीत गए कुछ पता नहीं चला , इस बीच मैं उसके बारे में इतना ही जान पाया की वह बलरामपुर चीनी मिल के पीछे स्थित सिरसिया फारम नामक गाँव से आता है , परंतु वह वहाँ क्यों रहता है, किसके पास रहता है , क्या वहाँ उसके कोई रिश्तेदार – नातेदार रहते हैं आदि दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मेरे लिए गोपनीय विषय था जबकि कहने के लिए मैं उसका सबसे करीबी दोस्त था । ऐसा नहीं है की मैंने उसके जीवन में झाँकने का प्रयास नहीं किया लेकिन जो बाहर आया वह इतना भर था , की उसकी शादी हो गई है उसके बच्चे भी हैं जो की उसके ननिहाल में ही रहते हैं । यह भी तब पता चला जब उसके अनुसार उसकी पत्नी गर्भवती थी और इस समय जबकि अभी वह पढ़ ही रहा था , अपने आपको इस नई जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं कर पा रहा था , वह नहीं चाहता था की उसका होने वाला बच्चा भी उसके नाना जी पर भार बने । उन दिनों जब वह घर से आया तो बहुत दुखी रहता था , कक्षा में भी उसका मन नहीं लगता , मेरे बार – बार कहने पर भी वह किसी विषय पर विमर्श के लिए अपने – आपको तैयार नहीं कर पाता । लेकिन एक दिन वह हँसते हुए मेरे पास आया और मेरे पैर छूकर बोला बड़े भाई आपका नुस्खा काम कर गया । मैं समझ गया की वह मेरे किस नुस्खे की बात कर रहा था । परीक्षाएं समाप्त हो गईं , उसका मेरे से अधिक नंबर आया , उस दिन वह बहुत खुश था । हम दोनों शीतला प्रसाद गुरु जी के घर पर एकत्र हुए और उनके द्वारा दिए गए निर्देश कम सुझाव से शोध के लिए दाखिला लेने का मन बना लिया । शोध का विषय रामकथा से ही संबंधित था , हम दोनों के विषय भले ही अलग – अलग थे परंतु दोनों की मूल भावना एक ही थी । शोध के विषय में बात चीत के बाद एक दिन मैं अपने गाँव जा रहा था , अभी मैंने बलरामपुर का चीनी मिल पार ही किया था की वह पीछे से मुझे पुकारते हुए आया , बड़े भाई कहाँ जा रहे हैं ? मैंने कहा , अपने गाँव । आज आप मेरे साथ मेरे घर चलिए , उसने कहा और मैं मान गया , साइकिल को उसके पीछे लगाकर पहुँच गया उसके गाँव । अब तक अंधेरा हो गया था । गाँव की गलियों में से होते हुए हम एक पुराने खपरैल के घर के पास रुके , घर के अंदर से एक वृद्ध महिला और पुरुष के वाक युद्ध ने मित्र के अंदर एक प्रकार के नैराश्य ने दस्तक दी , उसने तुरंत एक निर्णय लिया और मुझसे साइकिल घुमाने का अनुरोध किया , मैंने फिर अपनी साइकिल दोस्त के पीछे लगा दी , अब हम जिस घर में पहुंचे वह पक्का बना था , मेरा दोस्त गृह स्वामिनी को मौसी कहकर संबोधित कर रहा था । मौसी ने हमें बड़े प्रेम से खाना खिलाया , बीच – बीच में वह मुझसे मेरे घर आदि के विषय में पूंछती रही । उनका पूछना भोजन से अधिक स्वादयुक्त था । खूब खाने के बाद मैं अपने दोस्त के साथ छत पर लगे बिस्तरे पर लेट गया और बातें करने लगा अपने दोस्त से उसके आगे की योजना के बारे में , सुबह मैं जल्दी उठा , आज मैं अपने दोस्त के पिताजी से भी मिला जो कि पास के सरकारी प्राइमरी स्कूल के पास एक मंदिर में सन्यासी की भेष भूषा में थे , उनके सन्यास लेने का कारण समझने में मुझे कई वर्ष लग गए , परंतु वह थे बड़े सहृदय , उनके द्वारा मेरे दोस्त को साहब कर कर संबोधित करना इस बात का प्रतीक था की वह अपने बेटे से न सिर्फ प्रेम करते हैं बल्कि उसका सम्मान भी करते हैं । इस बात को बीते करीब 30 साल हो गए । मैंने कई बार उसे स्मरण किया । उसका दिया मोबाईल नंबर भी लगाया परंतु उसने जबाब नहीं दिया । कोई कहता है वह एस डी एम है कहीं का , कोई कहता है , कहीं किसी स्कूल में मास्टरी करता है । सही क्या है मैं इसकी तलाश किए बिना यह जानने के लिए अधिक प्रयासरत हूँ की वह कैसा है ।