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बदला

नागमणि कुमार सिंह 27 Aug 2026 कहानियाँ समाजिक बदला 24301 1 5 Hindi :: हिंदी

शीर्षक -बदला

	   	 सुधीर एक गरीब मजदूर का बेटा हैं I वह अनुसूचित जाति  से आता हैं I वह पढ़ने में बहुत तेज हैं I उसके पिता मजदूरी करते हैं I सुधीर को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते है I सबसे पहले वह ग्राम के प्राइमरी स्कूल में पढ़ा I उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए बाहर चला गया I सुधीर पढ़ने में तेज के साथ-साथ बहुत परिश्रमी, ईमानदार  एवं संस्कारी लड़का हैं I वह अपना खर्च निकालने के लिए छोटे-छोटे बच्चे को ट्यूशन  पढ़ाता  है I कभी-कभी  कुछ पैसा ग्राम भी भेज देता है ताकि माता-पिता  को कुछ मदद हो जाए I शहर में वह अभी प्रतियोगिता  परीक्षा  की तैयारी कर रहा है लेकिन उसे अभी तक अंतिम रूप से सफलता नहीं मिली हैं I लेकिन वह  हताश नहीं है आगे की पढ़ाई में वह और परिश्रम करना चाहता हैं I 

		अभी हाल ही में सुधीर रक्षा मंत्रालय में क्लर्क की मुख्य परीक्षा देकर आया हैं I उसका मुख्य परीक्षा के परिणाम आने के बाद साक्षात्कार  होगा, यदि वह इसमें  सफल होता है तो उसे अंतिम रूप से चयन कर लिया जाएगा I उसका मुख्य परीक्षा अच्छा गया है I उसे उम्मीद है कि वह मुख्य परीक्षा में पास कर जाएगा I वह अभी से ही साक्षात्कार की तैयारी कर रहा हैं I देश सेवा करने का भाव उसे बचपन से ही हैं I रक्षा मंत्रालय में नौकरी करना उसके लिए गर्व की बात होगी I 

		एक दिन डाकिया ने एक पत्र लाकर सुधीर को दिया I सुधीर ने उसे खोला तो पाया कि उसका चयन साक्षात्कार के लिया हो चुका हैं I 15  दिन बाद साक्षात्कार होना था I उसने साक्षात्कार के लिए कपड़े बनवाए I उसने साक्षात्कार के लिए कपड़े बनवाए I सुधीर साक्षात्कार की तैयारी में लग गया I उसने कई मुक  साक्षात्कार की तैयारी में लग गया I उसने कई मुक साक्षात्कार भी दिये I उसे अब लगने लगा था कि  इस बार मेरा चयन अवश्य  होगा I नियत समय एवं तारीख  पर उसने साक्षात्कार में शामिल हुआ I सुधीर का साक्षात्कार अच्छा गया था I उसे उम्मीद था कि इस बार उसका चयन जरूर होगा I वह परीक्षा फल का इंतजार करने लगा I 

		एक महीने बाद डाकिया से एक पत्र मिला I जिसमें सुधीर का चयन रक्षा मंत्रालय में क्लर्क के पद पर हो गया था I दो दिन बाद मूल प्रमाण पत्र का सत्यापन था जिसमें स्पष्ट  उल्लेख था कि यदि सभी प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं कराया गया तो उसे चयनित लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा I 

		सुधीर सब प्रमाण-पत्र जमा करने लगा I लेकिन उसका जाति प्रमाण पत्र 2 साल पुराना था I लेकिन पत्र में लिखा था कि जाति प्रमाण पत्र 6 महीना  से पुराना नहीं होना चाहिए I सुधीर अपने ग्राम गया और इस संबंध में अपने माता-पिता को बताया I सुधीर ने एक आवेदन बाज़ार से लाया I उसने मुखिया का हस्ताक्षर  करवाकर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के यहाँ  जमा कर दिया और आग्रह किया कि हमे रक्षा मंत्रालय में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए जाना हैं I हमारे पास सिर्फ दो दिन का समय हैं I उसने आग्रह किया कि प्रमाण पत्र जल्द से जल्द जारी कर दिया जाय I आवेदन जमा करने के बाद वह वही बगल के टेबल पर बैठ गया I 

		दो घंटे बाद प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने सुधीर को बुलाया और कहा कि दो दिन में जाति प्रमाण पत्र नहीं बनेगा I कम से कम एक सप्ताह लगेगा I सुधीर ने हाथ जोड़कर कहा,” महाशय यह रक्षा मंत्रालय का पत्र देख सकते हैं I इसमें सख्त निर्देश है कि समय-सीमा के अंदर प्रमाण पत्र नहीं प्रस्तुत करने पर चयनित सूची से बाहर कर दिया जाएगा I कृपा करके आज ही प्रमाण पत्र  जारी कर दे तो बहुत मेहरबानी होगी I प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने कहा कि,”यदि आज प्रमाण-पत्र चाहते हो तो दस हजार रुपए देना होगा और यदि कल प्रमाण पत्र चाहते हो तो पाँच हज़ार रुपए देना होगा I” सुधीर ने कहा “ हमारे माता-पिता मजदूरी करते हैं I हमे किसी तरह पढ़ाई करके नौकरी मिला हैं I हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं I हम अनुसूचित जाति से हैं I यह देखिये 2 साल पहले आपके ही कार्यालय ने यह जाति प्रमाण पत्र दिया था I उस समय तो बिना पैसों के बना था I कृपा करके आज जाति प्रमाण पत्र जारी कर दीजिए I 

		लेकिन  प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  ने मना कर दिया I वह निराश होकर अपना ग्राम वापस चला गया I घर में माता-पिता  को इस बात की जानकारी दी I 
	
		माता-पिता तो मजदूर थे इतने पैसे लाना असंभव था I उसने सुधीर को सुझाव किया कि कल तुम मुखिया जी के साथ ले जाना I यदि मुखिया ये बात बताएंगे  कि तुम अनुसूचित जाति से हो तो प्रखण्ड विकास पदाधिकारी मान  जाएगे और जाति प्रमाण पत्र जारी कर देगें I
	
		अगले दिन सुधीर मुखिया के साथ प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  के कमरे में गया I प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  ने सुधीर से पूछा पाँच हजार रुपए लाये हो I सुधीर ने जवाब दिया,” नहीं “ हमारे साथ मुखिया जी आए हैं वह बताएँगे  कि हम कितने गरीब है और अनुसूचित जाति से हैं I मुखिया ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  से आग्रह किया कि “ सुधीर मजदूर का बेटा हैं  और अनुसूचित जाति से हैं I “ लेकिन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  बिना पाँच हजार रुपये  लिए जाति प्रमाण पत्र देने के मूड में नहीं थे I स्थिति को देखते हुए सुधीर ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी   के पैर पकड़ लिया और फूट-फूट कर रोने लगा I लेकिन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  पर इसका कोई असर नहीं हुआ I मुखिया जी सुधीर को वापस ग्राम ले आए I 

		घर पहुँच कर सुधीर खूब रोया और सोचने लगा कि,” हाथ में आया लड्डू फिसल गया I ऐसे पदाधिकारी पर सख्त कारवाई होनी चाहिए I आजकल गरीब की कोई कीमत ही नहीं समझता हैं I उसके माता-पिता ने कहा कि तुम हिम्मत रखो I एक सप्ताह बाद जाति प्रमाण पत्र बन जाएगा I तुम प्रतियोगिता  परीक्षा की तैयारी करो इससे भी अच्छी नौकरी मिलेगा I हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ हैं I सुधीर बिना खाना खाये सो गया I 

		अगली सुबह वह बाहर के लिए निकल पड़ा I रास्ते में वह सोच रहा था कि अब पहले से अधिक परिश्रम करूँगा और मैं भी बड़ा अधिकारी बनूँगा लेकिन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी   जैसा नहीं I ईमानदार, सत्यनिष्ठा  और परिश्रमी अधिकारी बनूँगा I सोचते-सोचते उसे पता भी नहीं चला कि वह कब शहर आ गया I अपने कमरे में पढ़ाई शुरू कर दिया I वह लोक सेवा आयोग की प्रारम्भिक परीक्षा में सफल हुआ I मुख्य परीक्षा की तैयारी ज़ोरों से करने लगा I उधर घर से खबर आया की उसका जाति प्रमाण पत्र बन चुका हैं I घर आकर  ले जाए I 

		एक दिन वह ग्राम गया और जाति प्रमाण पत्र लाकर फ़ाइल में रख दिया I मुख्य परीक्षा  भी बहुत अच्छा गया था I उसे लग रहा था कि वह जरूर साक्षात्कार के लिए चुना जाएगा I कुछ दिनों में मुख्य परीक्षा का परिणाम आ गया I 

		सुधीर साक्षात्कार  कि तैयारी करने लगा I साक्षात्कार का अनुभव  उसे पहले से ही था I उसका साक्षात्कार बहुत अच्छा गया  उसे लग रहा था कि उसका चयन अंतिम रूप से जरूर होगा I कुछ ही दिनों बाद लोक सेवा आयोग का अंतिम परिणाम प्रकाशित हुआ I सुधीर पूरे राज्य  में 15 वां रैंक लाया था I अखबार में उसका फोटो भी लगा था I उसे पाँच दिनों के अंदर प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए बुलाया गया था I इस बार उसका सभी प्रमाण पत्र तैयार था I उसने सही समय और तारीख पर प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया I उसका सभी प्रमाण पत्र सही पाया गया I उसे राज्य में सतर्कता अधिकारी बनाया गया था I 

		सुधीर का सपना पूरा हो चुका था I वह सतर्कता अधिकारी बन गया था जिसका मुख्य काम  होता है राज्य में भष्टाचार को रोकना I सुधीर नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहा था I एक दिन उसे नियुक्ति पत्र प्राप्त हो गया I उसने बगल के जिले में अपनी सेवा कि शुरुआत कीI अभी सेवा शुरू हुए एक सप्ताह भी नहीं बिता था कि एक दिन एक छात्र ने आकर शिकायत किया कि ,” उसके प्रखण्ड के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पाँच हजार रुपए कि रिश्वत मांग रहा हैं I हम गरीब परिवार से है और पाँच हजार रुपए नहीं दे सकते हैं I आप जिले के सतर्कता अधिकारी है आप मेरे शिकायत का निवारण जल्द से जल्द करें I सुधीर को अपनी पहली नौकरी जाने कि घटना याद आ गयी I वह मन ही मन सोचने लगा कि हो न हो वही प्रखण्ड विकास पदाधिकारी हो जिसने मेरा पहला नौकरी खाया था I उसने छात्र से कहा,” तुम कल पाँच हजार रुपए लेकर ठीक 12 बजे प्रखण्ड विकास पदाधिकारी   के कार्यालय जाएगा I  तुम पैसा देने के बाद हमे इशारा कर देना I छात्र ने कहा  ठीक है जैसा आप बोलते है वैसा ही मैं करता हूँ I छात्र अपने घर चला गया I 

		अगले दिन ठीक 12 बजे छात्र सुधीर के दिये हुए पाँच हजार रुपए का साथ प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  के कार्यालय  में पहुंचा I प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  बहुत खुश हुआ I पाँच हजार रुपए छात्र से लिया और जाति प्रमाण पत्र जारी करने कि बात कहा I जैसे ही छात्र ने सुधीर को इशारा किया I सुधीर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी   के रूम में आ गया I रूम में जाकर देखता है कि वह तो वही प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  है जिसने मेरा पहली नौकरी खाया था I उसने अपना पहचान पत्र दिखाया और बोला ,” मैं सुधीर जिला सतर्कता अधिकारी  आपको पाँच हजार रुपए रिश्वत लेने के जुल्म में गिरफ्तार करता हूँ I” प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  ने बहाना बनाया कि यह तो मेरा पैसा है I तो सुधीर ने कहा कि आपको याद है आज से दो साल पहले मैंने आपसे जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आग्रह  किया था I लेकिन आपने पाँच हजार रुपए नहीं मिलने पर मेरा जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था I 
	
		मेरी पहली नौकरी आपने खत्म कर दिया था I तब प्रखण्ड विकास पदाधिकारी   ने कहा कि हमें कुछ-कुछ याद है और फिर वह सुधीर के पैरों पर गिर गया और गिड़गिड़ाने  लगा हमे छोड़ दो सुधीर आगे से ऐसी  गलती नहीं करेगेI लेकिन सुधीर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी  को लेकर अपनी गाड़ी  में मुख्यालय कि ओर चल दिया I 


लेखक : नागमणि कुमार सिंह 

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Comments & Reviews

Rachna Kumari
Rachna Kumari This story is very much useful for society and people should learn from this

1 month ago

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