Adesh Kumar 28 Jan 2025 गीत समाजिक Google , हिन्दी शायरी , समाजिक , हिन्दी साहित्य #HindiPoetry #HindiKavita #HindiShayari #HindiKavya #HindiSahitya #HindiVerse #HindiLiterature #HindiPoems #HindiRhymes #IndianPoetry #IndianLiterature #IndianPoems #HeartfeltPoetry #EmotionalPoetry #LovePoetry #InspirationalPoetry #NaturePoetry #LifeReflections #PoeticExpressions #HindiPoet #HindiPoetryCommunity #HindiPoetryLovers #HindiKaviSammelan #HindiPoetryContest #HindiPoetryCorner #HindiPoetryChallenge 61356 0 Hindi :: हिंदी
मर्यादा सम्मान मान,
ये सब कुछ कुचल रही है
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है
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एक पिता बच्चों की खातिर
सारे दुखड़े झेले..
लेकिन बेटा वियर बार में
रसियन रसियन खेले...
सोच से कई गुना ज्यादा...
हो..................
सोच से कई गुना ज्यादा
ये पीढ़ी बदल रही है .....
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है ....
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सहकर दर्द जनम दे डाला
अरमानों से पाला .....
उसके मुंह को नहीं मिला
बेटे से एक निवाला .....
जनम की जननी माता....
हो......
जनम की जननी माता
वृद्धाआश्रम में पल रही है.....
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है.....
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राह देखती रहें सदा
माँ वाप की बूढी आँखें......
मिलने तक ना बेटे आये
टूट गई जब साँसें....
विडियो कॉल से रस्म निभाके....
हो...
विडियो कॉल से रस्म निभाके
अब काया जल रही है........
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है .....
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मर्यादा सम्मान मान,
ये सब कुछ कुचल रही है .......
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है .......
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