Pratibha Khadekar 21 Jun 2024 गीत अन्य Writer Pratibha Khadekar 59226 0 Hindi :: हिंदी
वहा चांद छुपा आईने में
रचनाये -प्रतिभा खडेकार
हे हे हे ला ला ला ला ला,,हे हे हे ला ला ला ला ला...
वहा चांद छुपा आईने में,, देखते मुस्कुरा ती ग़ज़ल
बरस्ते बादलों ने ढक दिया चांद को
पहल ये बन गईं,,कब मैं शायर बनूंगा
गरज गरज गुंजूगा ... हे हे हे
कितनी गहराई से बदन पर बुंदे
पैरों से झलकें गर्दन तक उड़ जाये
हे हे हे ला ला ला ला ला,, हे हे हे ला ला ला ला ला
वहा चांद छुपा आईने में,, देखते मुस्कुरा ती ग़ज़ल
उसकी परछाई ने छु लिया हमें
घेरता गया उसे बादलों का डेरा
निले काले बादलों में से
बरसें पानी के ये बुंदे
छल छल छल चुम जायें धरती को
अपनी अंदर समायें झुम जाए ज़मीं
हे हे हे ला ला ला ला ला,, हे हे हे ला ला ला ला ला
वहा चांद छुपा आईने में,, देखते मुस्कुरा ती ग़ज़ल
सिने से धरती के मैं लिपटु
सुकून मां की गोद का पाऊं
बादल ने हमें बताया
बदलते मौसम में बह जाना,,
जाना जाना जाना जाना जाना
गरज़ते हुए शोर मचाना
हे हे हे ला ला ला ला ला,, हे हे हे ला ला ला ला ला
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