DINESH KUMAR KEER 08 May 2023 गीत समाजिक 31083 0 Hindi :: हिंदी
नारी स्त्रियों में एक गुण होता है जो की बहुत ही अद्भुत है..... वह गुण ये है के .... कोई भी पुरुष कितना भी सभ्य और चाहे कितनी भी सौम्य भाषा में स्त्री से बात करें.... स्त्री तत्क्षण उस पुरुष के मन को भांप लेती है.. पढ लेती है..... चंद बातों मे पुरुष को पहचान लेती है....... उसके भीतर भरी प्रामाणिकता को... उसके भीतर दबी पङी कामुकता को.... उसके भीतर चाहे फूल हों..... उसके भीतर चाहे कचरा हों .... वह तत्क्षण जान लेती है.... लेकीन स्त्री को जानना पुरुषों के लियें बड़ा कठिन है..... 'स्त्री बिना पुरुष' अधूरा ही नहीं... वरन् असंभव ही है...... और मजे की बात तो यह है कि... बिना पुरुष के स्त्री अधुरी होकर भी अस्तित्वमान हो सकती है.... यहीं कारन है के स्त्री बङी ही नाजुक होकर भी जीवन की जननी भी है.... स्त्रियों मे छिपे इसी गुण के कारण उनको आदर की नहीं...सम्मान की नहीं... वरन... स्वतंत्रता की नितांत आवश्यकता है.....।