Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

घर की याद

Saurabh verma 30 Mar 2023 गीत दुःखद #घर की याद #मां का प्यार#love 44624 0 Hindi :: हिंदी

शहर मैं जब आया ,
थोड़ा सा घबराया ,
देख उसकी भव्यता को,
मन मेरा सकुचाया,
मन मेरा उदास था ,
घर न मेरे पास था।
पर मुझपे भी जिम्मेदारी थी।
मां बाप के सपनो की सवारी थी।
मां ने बताया था, पापा ने समझाया था,
सपनो को तुम्हे सच करना है,
जितना लड़ सको उतना लड़ना है।
हार न मानना तुम कभी ,
घर को निहारना न तुम कभी,
हम तो तेरे पास होंगे ,यही मान लेना,
बस जीतना है ,तुझको ये ठान लेना,
ये सोच कर आंखों में पानी आ गया।
लगा ऐसा की मानो मैं अपने घर को पा गया,
रुका तो खूब शहर में पर घर जैसा प्यार ना पाय।
इतने सालो में मैं बहुत कम ही घर आया।
घर तो मेरा पूर्ण संपन्न था ,
मेरे आने से हो गया विपन्न था,
बाबा का प्यार अम्मा का दुलार ,
बहुत याद आता था पापा का मार।
मेरे आने से मां खूब रोई थी ,
जैसे उसने पूरी दुनिया ही खोई थी,
अब वो लगी थी अकेले रहने ।
थे पांच भाई नौ बहिनें,
भुजा भाई प्यार बहिने,
स्नेह भाई दुलार बहिनें।
मैं पांचवा अभागा मां का प्यार ना पा पाया,
उस दिन बहुत खुश हुआ जब घर वापस आया।

                         ।।सौरभ वर्मा।।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

पढता था मैं दिन रात किताबे, तो कभी किताबों में ज़िंदगी का अर्थ ढूँढा करता था पर जीना तो मुझे ज़िंदगी की किताबों ने सिखाया कोई मतलब नही थ� read more >>
चक्रधारी सुनो विष्णु जी ओ तुम मेरे मन को भाए.....2 तुम कृष्ण रूप में आए मां बाप का बढ़ाए तुम राम रूप में आए मां बाप के वचन निभाए चक्रधार� read more >>
ये खुदा बता तूने क्या सितम कर दिया मेरे दिल को तूने किसी के बस मैं कर दिया वो रहा तो नहीं एक पल भी आकर टुकडें- टुकड़ें कर दिये ना विश्वा read more >>
Join Us: