Anilkumar Rathwa (Sameer) 28 Jan 2026 ग़ज़ल समाजिक “सुकून की सल्तनत” 13138 0 Hindi :: हिंदी
दुनिया ने मुझसे पूछा, तूने क्या कमाया है, मैंने कहा, मेरे दिल ने सुकून पाया है। सोने की चाह में जब चैन को भुलाया है, हर रात ने मुझे मेरे ही सवालों से जगाया है। भीड़ के शोर में खुद को बहुत लगाया है, ख़ामोशी ने ही मुझको मेरा घर दिखाया है। महलों की ऊँचाई ने दिल को छोटा बनाया है, एक झोपड़ी की हँसी ने रूह को समाया है। लक्ष्यों की दौड़ में खुद को बहुत थकाया है, एक पल की शांति ने फिर मुझे उठाया है। “अनिल” कहे ऐ ज़िंदगी, तूने क्या सिखाया है, दौलत नहीं, सुकून ने ही मुझे बादशाह बनाया है।