मोती लाल साहु 03 Oct 2025 ग़ज़ल अन्य 'आसमांँ से ऊंँचा हौसला: इश्क़-ए-रूहानी और बेफ़िक्र ज़िंदगी।' मोहब्बत का असर' मंज़िल की खबर: हर लम्हा एक हुनर।' जोश-ए-परवाज हो तो आसमाँ भी छोटा है 14917 0 Hindi :: हिंदी
जोश-ए-परवाज़ हो तो आसमाँ भी छोटा है, कोई चोटी नहीं अरमानों से ऊँचा शिखर। वो तलाश-ए-सुकूँ जो दिल में ठहरी है अब, नहीं सागर से गहरा, है मोहब्बत का असर। न कोई मंज़िल यहाँ, न कोई रस्ता है सीधा, बस जुनून-ए-सफ़र है और मंज़िल की ख़बर। ये फ़ासले, ये अड़चनें, ये दुनिया की भीड़, किसमें ताक़त है रोके, जब रूह है बे-फ़िकर। हाँ, माना दौड़ में मेरी सवारी है तेज़ मन की, कोई और रफ़्तार न भाए, न मुझको मुफ़ीद। ये 'दीदार-ए-इश्क़' की लौ है, ये 'नूर-ए-इलाही' सा ख़्वाब, ज़िंदगी है इबादत, और तमन्ना ही पीर। न फ़िक्र-ए-दुनिया है, न खोने का डर कोई, बस अपनी रौशनी हूँ, और अपना ही घर। ये टूटते-बनते सपने, ये दिल का 'वाइब' (Vibe) है, हर लम्हा एक कथा, हर धड़कन है हुनर। -मोती