Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
Certificate is not issued to the author at present. Minimum 10 articles should be published on Sahity Live website to get the certificate.

विकाश

RANJIT MAHATO 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #विकाश ,विकाश, #vikash 57048 0 Hindi :: हिंदी

विकाश के नाम पर विनाश की ओर
बढ़ रहा मनुष्य है |
प्रकृति के नियमों को अनदेखा कर,
बढ़ रहा मनुष्य है |
विनाश को विकाश समझकर,
बढ़ रहा मनुष्य है |
गंगा को मैली कर ,
बढ़ रहा मनुष्य है |
यमुना को दूषित कर,
बढ़ रहा मनुष्य है |
जंगलो और वृक्षों को काट कर,
बढ़ रहा मनुष्य है |
गांवो को शहर बनाकर,
बढ़ रहा मनुष्य है |
विकाश के नाम पर विनाश का यन्त्र निर्माण कर,
बढ़ रहा मनुष्य है |
सबकुछ समझ कर भी न समझ बन,
बढ़ रहा मनुष्य है |

By-Ranjit Mahato

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: