Santosh kumar koli ' अकेला' 11 Jun 2024 कविताएँ समाजिक होत के चोचले 30936 0 Hindi :: हिंदी
होत में होता, नानी का श्राद्ध। होत में दादा का, जन्मदिन आता याद। साल की लड़की की लड़की का, मायरा लेते लाद। ख़लक़ पहुंचता, काज़ी की कुतिया के दाग। होत में, होती है होत। होत में, घी से जलती जोत। होत में , कलाकंद से मनती चौथ। होत में ही रीस की, बैठती है ब्योंत। होत में ही सूझ को, सूझता भविष्य झट, वरना, रोटी तक जाती सिमट, होत में होते, बाल, तिया, खुद हठ, होत में, याद आएं मंदिर, मठ।