Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
Certificate is not issued to the author at present. Minimum 10 articles should be published on Sahity Live website to get the certificate.

बादल

Umendra nirala 17 May 2024 कविताएँ अन्य Umendra nirala sahitya rachna 78356 0 Hindi :: हिंदी

हे बादल!
अब तो बरसो 
भू - गर्भ में सुप्त अंकुर 
क्षीण अनाशक्त, 
दैन्य-जड़ित अपलक नत-नयन
चेतन मन है, शांत।
नीर प्लावन ला एक़ बार 
देख प्रकोप हृदय थामेगा संसार,
तेरी हुंकार से ऊषा होगा 
क्षत - विक्षत अंकुर का उद्धार।
गिरी का गौरव है, ऊँचा 
दिखा ताड़ित आघात-आक्रोश,
नत-मस्तक होगा सिर उसका 
शक्ति-प्रभाव से फूट अंकुर वृक्ष होगा।
आतंक भवन ढहाने को
लाओ उनमें नया उन्माद,
अर्ध-क्षुधित, निरस्त्र, शोषित- जन
शक्ति का रस भार।
ताप-ऊमस की भीषणता का प्रतिकार
तुझे बुलाता सहमा श्रमिक,
प्लावन को उत्तेजित कर 
नव-जीवन का हो खुशहाल।

                          नाम - उमेन्द्र निराला 
                        अध्ययन - इलाहबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रयागराज (उ. प्र.)
                        पता - ग्राम हिनौती, पोस्ट ऑफिस -सिजहटा, तहसील - रामपुर बाघेलान, जिला - सतना (म. प्र.)

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: