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शायरी
हजारों मिलों की दूरियां भी तुमसे हमको हमेशा करीब रखता है क्या हुआ जो पास नहीं तुम तुम्हारा ऐहसास ही दिल को खास लगता है।
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फागुन ले गई गिला शिकवा-ए-दूरियां होली में
हो गई- ले गई फागुन में हो गिला-ए- शिकवा फागुन में हो लाई तू- रंगों का उत्सव होली में मिटेंगे दूरियां होली में..... -मोती
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फागुन संग चैती का रंग- नव वर्ष का नवा बिहान आयो रे
रंगों मन फागुन के रंग- हो भाई नव वर्ष आयो रे रंगों मन प्रेम के रंग में- हो सखी नव वर्ष आयो रे फागुन संग चैती का रंग- नव वर्ष का नवा बिहा�
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होली आई रे- आई रे होली आई रे
होली आई रे- आई रे होली आई रे रंग-ए-गुलाल लेकर- आओ होली आई रे प्रेम रंग तन मन रंग लो- हर भेद भाव निकालो रे होली आई रे- आई रे होली आई रे..... -�
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कहते हैं आग सबकुछ जला देती है कुछ पुरानी तमंन्नाएँ हैं मेरे पास
कहते हैं आग सबकुछ जला देती है कुछ पुरानी तमंन्नाएँ हैं मेरे पास
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कास कोई
कास कोई मेरे सपनों में भी आती और अपने रूप यौवन से तरसाती। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
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तुम मेरी जिन्दगी
तुम मेरी जिन्दगी बन गई हो ऐसा हुआ कमाल, तब से अनवरत मैं कर रहा हूं मस्त-मस्त धमाल। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्त�
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दुनियाँ में तो
दुनियाँ में तो ग़मों का महासागर है, पर हम भी तो हर गुण से आगर है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
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कयामत की तुम
कयामत की तुम बेमिसाल सूरत हो, आब की तुम अद्वितीय मूरत हो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:- समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
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मेरे लिए
मेरे लिए तुम कुछ भी कर लो ओ मेरे यार, दुनिया वालों को हैरत में डाल दो ओ मेरे हार। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीप�
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जीती जागती
प्यार की तुम जीती - जागती देवी हो हृदय की तुम जैसे सूरज की किरण हो । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहा
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हुस्न
तूँ हुस्न के रंगों से लिखी हुई ग़ज़ल है, प्यार के दरिया में खिलता हुआ कमल है।
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