ईमान बेच चुके हैं, न जाने किस लाचारी में
खड़े हैं दो-चार, उस मक्कार की तरफ़दारी में
जिधर मिले मुनाफ़ा , उधर ही ढुनक जाते हैं
दो-चार बैंगन ऐस� read more >>
में नही जानती कि मेरी तकदीर में खुदा ने तुझे लिखा या नही ।
पर मेरा प्यार मेरे लिये खुदा की इबादत से भी कम नही ॥
जनत की चाह नही मुझे' तेरे � read more >>
मंजिल का पता है न ज़माने की खबर है।
हर ग़म से अन्जान हूँ वे खौफ नज़र है।
आज जो मै खडी हूँ आप सब के सामने
ये सब मेरी माँ की दुआओं का असर है।
� read more >>