मुझे तलाश है मंजिल की |
मैं बढ़ता हुँ अपनी मंजिल की ओर ,
फिर मन में ख्याल आता है ,
बढ़ रहा हुँ जिसे पाने के लिए ,
वो मेरी मंजिल नहीं |
फिर मैं म� read more >>
व्यंग्य-कथा
उल्लू है जी!
बचपन में उल्लू का महिमामंडन करते हुए जब गुरुजी मुझे डांटा करते थे,‘‘उल्लू कहीं का!’’ तब पहली बार एहसा read more >>
हास्य-व्यंग्य आंदोलनजीवी
पड़ोसी ने मुझसे पूछा,‘‘भाईसाहब, अभी तक मैंने परजीवी शब्द सुन रखा था, जो दूसरे का खून चूसकर जिंदा रहता ह� read more >>
अनमोल जैसा नाम वैसा चरित्र
यही नाम था उसका अपने नाम अनुसार वह भी अनमोल था सिर्फ मेरे लिए नहीं सबके लिए।
यह बात तब की है जब मैं 12 साल का थ� read more >>
हां मैं कभी थकता नहीं मैं कभी रुकता नहीं, क्योंकि मैंने अपनी पत्नी से-- वादा किया है उसे हर खुशियां दूंगा,- हां मैंने वादा किया है_ कि उसे � read more >>
प्रथम अंक
हम उन दिनों की बात करता हु कि जब मै , नारण लाल , कालूराम, जितेद्र सिंह और अरविन्द जैन आदि एक छोटे से विद्यालय में पढ़ने जा रहे हो read more >>
उसका नाम विनोद था, सारी जिम्मेदारियां,
उसके कंधों पर था,
वह प्रतिदिन अपने पिता के लिए, शराब लाने के लिए, जाया करता था, उसी शराब के कारण, � read more >>