कम हो गया है मरतबा इश्क़ का आज ,
जिस पर खुदा को था बहुत ज्यादा नाज़ ।
गर रहता मोईन, इश्क ए जुनून उधर अब भी सवार,
तो यूं ही ख़त्म न होजाती दुनिय� read more >>
यहां था कोहरा घना, मैं था अंधेरों से सना। तेरी जो धूप परी मुझ पे, मैं भी उजालों से बना। तेरी किरणों के फुहारों में, मन रोशनी से भींग गया। � read more >>
हमारा नाम ना लेकर, कभी उन्हें नींद ना आई
कभी वो याद करती है, कभी वो बात करती है।
ख्यालों में तो पल पल हम उनको याद करते है
मुलाकाते जब होत� read more >>