हम बचपन में छुट्टी के बाद खाना खाते ही शुरु हो जाते थे.....
फिर जब शाम को वापस खाने का समय होता तब ही वापस घरों को रूख करते थे।
आजकल के बच� read more >>
नारी ज्योति व ज्वाला...
दो प्रकार के नारी होती है, एक सुघड़ आदर्श नारी और फूहड़ नारी, सुघड़ नारी अपनी सहनशीलता, विवेक, धैर्य, संयम, मधुर भाषा � read more >>
"सती" जिसका नाम सुनते ही रूह काँप जाती है, बदन का रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो जाता है, दिल में एक अलग तरह की सनसनी पैदा हो जाती है, हम यह सोच भी नहीं read more >>
फितरत...
इन्सान की फितरत है कभी नहीं बदलती है
वक्त के साथ लोग बदल जाते है
चूहा पत्थर का हो लोग पूजा करते है जिंदा हो तो बिना मारे दम नहीं � read more >>