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Tulasi Seth

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@ tulasi-seth-77
, Odisha

I am a housewife and I love to read and write

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My Articles

आदत तुम्हारी लग न जाए यही सोच कर वस दूर रहते हैं दूरियां शब्द तो नाम का है खाली हम काहां तुम को कब भुल पाते हैं read more >>
तेरी चाहत की हरीयाली चुनर युं दिल में है ऐसी सजी सतरंगी सा जीवन लागे मधुर मय हरपल हो जैसी read more >>
आजकल यादें तुम्हारी बहुत परेशान कर रही है हमें।सायद इसलिए की हम तुम्हें याद करना चाहते नहीं ओर तुम याद आ जाते हो हर पल।हम चाहते हैं त� read more >>
एहसास तुम्हारा कुछ इस तरह है तुम पास भी नहीं, और मेरे साथ भी हो। read more >>
हसरतें दिल की दवी रह गई जुवान से न निकला लफ्ज़ कोई सपने तो थे सुनहरे क‌ई जो सपने में ही, कहीं खो ग‌ई। read more >>
जन्नत की चाह थी हमें कैसी कीचड़ में आके डुब ग‌ए दुसरों को तकलीफ़ न हो चाह में इसकी, खुद की खुशी का ध्यान रखना ही भूल ग‌ए। read more >>
नादानी कुछ ऐसी थी हमारी के दिल को हम वहलाते रहे, काम सायद कुछ भी न था उस वक्त तभी तो दिल का दर्द वढाते रहे, प्यार था बस एक हवा का झोका झो� read more >>
अक्सर किसी की वेरुखी किसी की निंद और चैन छिन लेते हैं और उस सख्स को कोई फर्क ही नहीं पड़ता है ‌। read more >>
क्युं जाति के नाम पर गुनाह हजारों पल रहे हैं, उच्च नीच की तराजू में नित तोल रहे हैं । क्या ठप्पा लगाकर आए थे सब के मैं धनी तु निर् read more >>
ତୁମେ ନାହିଁ ବୋଲି ତୁମେ ଅଛି ଭାବି ଝୁରେ କାହିଁ ଏ ମନ? ତୁମେ ଦୂରେ ବୋଲି ତୁମେ ପାଖେ ଭାବି ଝୁରେ ତୁମ ପାଇଁ ମନ। ତୁମେ ସିନ୍ଧୁ ବୋଲି ତୁମ ନଦୀ ପରି ଧାଇଁ ଯା� read more >>
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