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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
@ sandeep-kumar-singh
, Bihar
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.
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नया साल की है खुशी
नया साल की है खुशी,झूमें घर परिवार । खुद को सभी सुधार कर, जीवन कर गुलजार।। अंतिम दिन है साल का, करना नहीं मलाल। नए साल में हम सभ�
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नया साल और पुराना साल
पुराने साल का बहुत- बहुत धन्यावाद। नया साल का दिल से स्वागत है । पुराने साल को धन्यवाद इसलिए की जो भी हुआ -जैसा भी हुआ लेकिन नया साल
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नूतन साल खुशियां भरे
नूतन साल खुशियां भरे,लाए मधुर बहार। जीवन सुरभित खूब हो, दिल में हो अति प्यार।। दिल में हो अति प्यार,चाह पूरी हो सबका। सबमें झलके जोश,क�
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अच्छा करना सोच है-मन में है तूफान
अच्छा करना सोच है,मन में है तूफान। विपदा का कर सामना,फलप्रद किया जुबान।। मन में है तूफान रब, दे दे दृढ़ वरदान। खुशियां भरूं समाज में, �
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स्पर्धा का दौर है-मन को रखें बुलंद
स्पर्धा का दौर है,मन को रखें बुलंद। रखिए ऊंच विचार को, हों शीतल सम चंद।। स्पर्धा का दौर है, रखें साथ उत्साह। कम हों कभी न चाह नव,लगे सु�
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सुख दुख हैं मेहमान जी
सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भी प्रभु मै
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जलने लगे अलाव अब ठंढ़ी चारों और
जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों और। थड़थड़ हैं तन कांपते, नहीं बंधते कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नहीं,गाते सब य
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इच्छाएं बेअंत है-काबू में रख यार
इच्छाएं बेअंत है,काबू में रख यार। बेहिसाब रख प्यार को, सुख मय हो परिवार।। इच्छाएं बेअंत है, परम् जरूरी आप। मैं चाहूं जग का भला, करूं मं
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सदा फर्ज पालन करें-मिलता दिल से मान
सदा फर्ज पालन करें,मिलता दिल से मान। और मिले सबसे दुआ,घटता कभी न शान।। जीना मत अपमान सह, ओ मेरे प्रिय यार। ऐसों को हम दें सजा,मित्रों क�
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एक मां के दो पुत्र-चोर सिपाही
एक मां के दो पुत्र थे। उनके पति का कुछ दिन पहले अकास्मिक मौत हो गई थी। मां अपने दोनों पुत्र को पहले से और अधिक प्यार करने लगी। तथा मां_बा�
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