बहर:_2121,1212,22
काफिया:_आए
रदीफ:_हैं
गज़ल
आज शाम नरम हवाए हैं,
बेरुखी म अदा जगाए हैं।
लोग आज मनों रगों में रख,
प्यार सिर्फ़ मधु आजमाए हैं।
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जिन्दगी को महोत्सव की तरह जीना है,
हर गम को खुशियों से निकाल देना है।
बड़ी ही नियामत से यह जीवन मिला है,
पल _पल इसमें हसी की रंग भरना ही � read more >>
तेरे श्रंगारों में मैं ही तो बसता हूं,
तेरी हर अदाओं का मैं ही तो दिवाना हूं।
और कोई चेहरा ना पहचानु,
तूं ही तूं चारों तरफ_
तूं ही तूं चा� read more >>