मेरा नाम क्रान्तिराज पटना बिहार का रहने वाला हुँ,हमें बचपन से ही एक समाजिक कवि के रूप उभरने का शौक था और आज भी है और रहेगा ! हम दिल से साहित्य मंच को बधाई ससमर्पित करता हुँ ,जो हमें अपनी विचार साझा करने का मौका प्रदान किये !
जीवन जीने का हर रंग बताओ ,
गीत गाकर हमें सुनाओ -२ .
गहरा प्यार का समुद्र न बनाना ,
वरना हो जायेगा कोई अपसाना ,
कहावत किसी ने ऐसा सुनाया ,
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मेरी ताकत को कौन बताए,
जो लिखे वो समझाए !
मेरा लिखा मिट न पाए ,
लिख दे ,किसी का तकदीर ,
जीते जागते आदमी भी बन जाए ,फकीर !
रूठ जाऊ तो मेरा नसी� read more >>
मुखड़ा- ना लेके आया जग में ना लेकर जाना रे $
खाली हाथ आया जग मे खाली हाथ जाना रे -२ !
अंतरा -माता -पिता भाई -बहन माया के जाल रे $
बेटा -बेटी बह� read more >>