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Arti sharma

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My Articles

खाकी वर्दी मेरे ईमान की ईफाजत कर गई, खुद मिटकर मेरे भारत को एक बार फिर आबाद कर गई।। read more >>
कहने को तो जमाना था मेरा , पर मां कहलाने वाला कोई न था मेरा ।। read more >>
मां की नम आंख मुझे अंदर से तोड़ गई, खुद समेट कर एक बार मुझे फिर जोड गई।। read more >>
चाय और पीयू ऐसा दौर आया, शायर को जगाने फिर कोई शायर आया।। read more >>
मेरा लिखा हर अल्फाज तेरा मुकद्दर बन गया, अब इस गालिब का हर ख्याल मेरी मन्नत का समंदर बन गया ।। read more >>
हर बार उम्मीद टूटी , ऐसी कोई जंजीर फिर रूठी ।। read more >>
ख्वाब का समंदर फिर टूटा है, ऐसा ही शीशा फिर एक बार छूटा है ।। read more >>
नम आंखे गम बन गई, गम मेरी तन्हाई बन गई, तन्हाई मेरी तकदीर बन गई, तकदीर मेरी तस्वीर बन गई, तस्वीर मेरी रुसवाई बन गई, रुसवाई मेरी भरपाई बन गई read more >>
गम की चादर ने मुझे ओढ रखा है , ऐसी ही अपनी तन्हाई ने मुझे जोड रखा है ।। read more >>
खो - खोकर, खोने वाले तेरा खेल निराला है , हर बार तुम्हे अपनाने वाला मेरे जैसा कोई परवाना है ।। read more >>
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